कांग्रेस ने ईरान पर युद्ध के बीच मोदी के इजरायल दौरे पर उठाए सवाल
कांग्रेस का आरोप
ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला: कांग्रेस ने ईरान के खिलाफ शुरू हुए युद्ध से पहले पीएम नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी पार्टी ने रविवार को यह आरोप लगाया कि इस युद्ध पर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ है, और यह दर्शाता है कि देश पीएम मोदी की विदेश नीति की भारी कीमत चुका रहा है।
जयराम रमेश का बयान
कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, 'चाहे पीएम और उनकी टीम कितनी भी कोशिश कर लें, सच्चाई यह है कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए हुए हैं और बार-बार उस व्यक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं, जिसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई में स्पष्ट रूप से उसका समर्थन किया है।'
व्यापार समझौते पर सवाल
रमेश ने आगे कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि उन्होंने 10 मई 2025 को भारत के निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर को रोकने में हस्तक्षेप किया। लेकिन पीएम मोदी इस पर चुप हैं। ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की थी।'
ट्रंप की घोषणा
उन्होंने कहा, '2 फरवरी 2026 को ट्रंप ने कहा कि पीएम के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है। यह स्पष्ट है कि यह पीएम मोदी की एक हताश पहल थी। इसके 18 दिन बाद, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ रणनीति को अवैध घोषित किया।'
ईरान पर हमले की समयसीमा
रमेश ने कहा, 'पीएम मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इजरायल का दौरा किया, जबकि पूरी दुनिया को पता था कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल का सैन्य हमला होने वाला है। पीएम मोदी के इजरायल से रवाना होने के दो दिन बाद ही यह हमला शुरू हुआ। वहां उनका भाषण नैतिक कायरता का उदाहरण था।'
चीन के प्रति मोदी की नीति
उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने 19 जून 2020 को चीन को क्लीन चिट दी थी, जब लद्दाख सीमा पर हमारे 20 जवान शहीद हुए थे। यह बयान हमारी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर रहा है और हमें चीन की शर्तों पर संबंधों को सामान्य बनाने के लिए मजबूर कर रहा है।'