कांग्रेस ने ओडिशा के विधायकों को बेंगलुरु भेजा, हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
कांग्रेस का एहतियाती कदम
राज्यसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस ने ओडिशा के अपने नौ विधायकों को कर्नाटक के बेंगलुरु भेजने का निर्णय लिया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह कदम विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन से बचाने के लिए उठाया गया है।
कांग्रेस के 14 विधायकों में से नौ बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को केवल पांच विधायक उपस्थित थे, जिनमें कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता रामचंद्र कदम और अन्य वरिष्ठ विधायक शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार रात को छह विधायक बेंगलुरु पहुंचे। इनमें अशोक कुमार दास, सी.एस. राझेन एक्का, कद्राका अप्पलास्वामी, मंगु खिल्ला, नीलमाधव हिकाका, पबित्र सौंता, प्रफुल्ल चंद्र प्रधान, सागर चरण दास और सत्यजीत गमांगो शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने मीडिया से बातचीत में विधायकों को बेंगलुरु भेजने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास भी विधायकों के साथ बेंगलुरु में मौजूद हैं।
कदम ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसका इतिहास विधायकों की खरीद-फरोख्त और दल-बदल कराने का रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसकी डबल इंजन सरकार हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल रहने के लिए जानी जाती है। इस प्रकार के प्रयासों को रोकने के लिए हमारे नौ विधायक बेंगलुरु गए हैं और वहां से दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम पूरी तरह से एहतियाती है ताकि राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों पर किसी भी बाहरी दबाव या लालच का असर न हो।
वरिष्ठ कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनिपति ने भी कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका के कारण पार्टी ने कुछ विधायकों को बेंगलुरु भेजा है। उन्होंने कहा कि ऐसी आशंका है कि विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।
बहिनिपति ने यह भी कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी हमारे विधायकों को खरीद नहीं सकता। कांग्रेस के विधायक बिकाऊ नहीं हैं और वे मजबूती से पार्टी के साथ खड़े रहेंगे।
राज्यसभा चुनाव को लेकर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।