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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उत्तराखंड में टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उत्तराखंड में टेंडर प्रक्रिया में बदलाव के आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि भाजपा ने नियमों में बदलाव कर अडानी को काम सौंपा। उन्होंने इसे 'Pushkar Selling Uttarakhand' का नाम दिया और बताया कि कैसे 1320 MW का थर्मल पावर प्लांट का प्रस्ताव रद्द किया गया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

पवन खेड़ा का आरोप


नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नियमों में बदलाव कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया है, जिससे काम अडानी को सौंपा गया। उन्होंने इसे 'Pushkar Selling Uttarakhand' का नाम दिया और कहा कि भाजपा की टीम ने 86 नियमों में से 84 को बदल दिया।


खेड़ा ने बताया कि 2024 में मुख्यमंत्री धामी ने कोयला मंत्री को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें 1320 MW का थर्मल पावर प्लांट लगाने की बात की गई थी। यह जॉइंट वेंचर (UJVN-THDC) के तहत होना था, लेकिन 16 जनवरी 2025 को अचानक उत्तराखंड सरकार ने इसे रद्द कर दिया। सरकार का कहना था कि यह वेंचर समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा, जबकि जॉइंट वेंचर ने समय पर पूरा करने का आश्वासन दिया था।


इसके बाद, 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार ने एक नया टेंडर जारी किया। उसी दिन अडानी पावर ने छत्तीसगढ़ में कोरबा एक्सपेंशन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी के लिए आवेदन किया। टेंडर निकालने वाली UPCL ने 86 शर्तों में से 84 को बदलने की मांग की, और नतीजतन, सभी शर्तें बदल दी गईं। इनमें से एक शर्त यह थी कि 1320 MW बिजली एक ही बिडर से आनी चाहिए।


खेड़ा ने कहा कि भाजपा की टीम ने अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की समय सीमा बढ़ा दी। इसके अलावा, टैरिफ संरचना में भी बदलाव किया गया, जिससे अडानी पावर को 25 साल तक पैसे मिलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अडानी की कंपनी 'Pelma Collieries Limited' को 2022 में MDO बनाया गया है, जिससे कोयले की माइनिंग से लेकर बिजली उत्पादन तक का काम अडानी ही करेगा।


इस प्रकार, उत्तराखंड की जनता के पैसे से बिजली का उत्पादन होगा, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में चलेगा। 1.66 लाख करोड़ रुपए का पावर खरीद समझौता 25 अगस्त 2026 से ₹5.74 प्रति यूनिट की दर से शुरू होगा। इसका मतलब है कि पैसा उत्तराखंड का है, लेकिन लाभ अडानी को होगा।