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कांग्रेस महासचिव का राम मंदिर चंदे में गबन पर केंद्र सरकार पर हमला

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे और सोने के कथित गबन पर केंद्र सरकार और संघ परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे धार्मिक स्थलों पर हुई सबसे बड़ी लूट करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाएगी और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग करेगी। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और वेणुगोपाल के अन्य आरोप।
 

कांग्रेस का तीखा आरोप

कांग्रेस के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे और सोने के कथित गबन पर केंद्र सरकार और संघ परिवार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे भारत के किसी धार्मिक स्थल पर हुई सबसे बड़ी लूट बताया और सवाल उठाया कि इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन क्यों हैं।


संसद सत्र में उठेगा मुद्दा

केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाएगी और प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगेगी। उन्होंने कहा कि यह लूट देश के करोड़ों श्रद्धालुओं को प्रभावित कर रही है और कांग्रेस इसे पूरे देश में उठाने का प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक एसआईटी का गठन किया है, जिसका उद्देश्य असली दोषियों को बचाना है।


जांच की आवश्यकता

वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि केवल उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच से ही इस कथित लूट के असली दोषियों का पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैसे संगठनों ने पिछले 20-25 वर्षों में श्रद्धालुओं से चंदा इकट्ठा किया और अब उसी धन और सोने की लूट हुई है।


मंदिर ट्रस्ट पर आरोप

वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि यह सब मंदिर ट्रस्ट के उन अधिकारियों के कार्यकाल में हुआ है, जिनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की निगरानी में की गई थी। उन्होंने यह आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आरएसएस वास्तव में आस्तिक नहीं हैं, बल्कि उनकी रुचि केवल हिंदुओं के नाम पर लूटने और वोटों के लिए लोगों को बांटने में है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला बताया।


राजनीतिक उद्देश्य का आरोप

वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लिए यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, जबकि भाजपा और आरएसएस ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भगवान का इस्तेमाल किया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भाजपा की केरल इकाई इस मुद्दे पर चुप क्यों है, यह चुप्पी असली दोषियों को बचाने का संकेत है। इसके अलावा, उन्होंने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में भी इसी तरह की लूट के आरोपों का जिक्र किया।