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कादियां–ब्यास रेल परियोजना का पुनरुद्धार: पंजाब में ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत सरकार ने पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए कादियां–ब्यास रेल परियोजना को पुनर्जीवित किया है, जो लगभग 39.68 किलोमीटर लंबी होगी। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना और रेलवे अवसंरचना को मजबूत करना है। रेल मंत्री ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे स्थानीय लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी। यह रेल लिंक कई धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाएगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
 

कादियां–ब्यास रेल लिंक का महत्व

नई दिल्ली/चंडीगढ़/गुरदासपुर - भारत सरकार ने पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कादियां–ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को पुनर्जीवित किया है। रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज रेल भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में रेलवे अवसंरचना को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।


श्री बिट्टू ने बताया कि यह नई रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। लगभग 39.68 किलोमीटर लंबी इस ब्रॉडगेज रेल लाइन की अनुमानित लागत ₹1,400 करोड़ है। उत्तरी रेलवे द्वारा इस परियोजना का कार्यान्वयन किया जाएगा। यह रेल मार्ग कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास जैसे महत्वपूर्ण कस्बों से होकर गुजरेगा, जिससे स्थानीय लोगों को पहली बार रेल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिलेगा।


इस परियोजना में अत्याधुनिक रेलवे अवसंरचना का विकास किया जाएगा, जिसमें घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 प्रमुख पुल, 121 लघु पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB), आधुनिक सिग्नलिंग और दूरसंचार प्रणाली, और भारत की स्वदेशी ट्रेन टक्कर-रोधी प्रणाली ‘कवच’ शामिल हैं।


श्री बिट्टू ने परियोजना के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कादियां–ब्यास रेल लिंक की योजना ब्रिटिश काल में बनाई गई थी। इसे 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे द्वारा स्वीकृति दी गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब इसे सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपर्क परियोजना (SDRCP) के रूप में पुनर्जीवित किया गया है।


उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में अमृतसर–पठानकोट रेलखंड के वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी कार्य करेगी। इससे उत्तरी भारत में रेलवे संचालन की मजबूती और लचीलापन बढ़ेगा। इस परियोजना से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


यह परियोजना कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाएगी, जैसे कि कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह, और गुरुद्वारा दरबार साहिब। बेहतर रेल संपर्क से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होगी।


अंत में, श्री बिट्टू ने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला और पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।