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कासगंज में परिवार की सामूहिक मौत: क्या थी इसके पीछे की वजह?

उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक परिवार की सामूहिक मौत ने सभी को चौंका दिया है। सत्यवीर, उनकी पत्नी और तीन बच्चों के शव एक ही स्थान पर पाए गए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आर्थिक तंगी और बेटे की गंभीर बीमारी इस घटना के पीछे हो सकती है। जानें इस दिल दहला देने वाली घटना के बारे में और पुलिस की जांच के ताजा अपडेट।
 

कासगंज में दिल दहला देने वाली घटना


कासगंज : उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अमांपुर क्षेत्र में शनिवार शाम को एक दुखद घटना घटी, जिसने सभी को हिला कर रख दिया। नगला भोजराज के निवासी सत्यवीर, जो पिछले एक दशक से किराए के मकान में रहकर वेल्डिंग का काम कर रहे थे, अपने परिवार के साथ मृत पाए गए। चार दिनों से दुकान बंद रहने पर जब पड़ोसियों ने अंदर झांकने का प्रयास किया, तो उन्हें एक भयावह दृश्य देखने को मिला। पुलिस अब इस सामूहिक मौत के मामले की जांच कर रही है।


दुकान का शटर बंद था

सत्यवीर की दुकान का शटर पिछले चार दिनों से नहीं खुला था, जिससे ग्राहक निराश होकर लौट रहे थे। शनिवार शाम कुछ लोग दुकान के पीछे गए और खिड़की से सत्यवीर का शव फंदे पर लटका हुआ देखा। जब ग्रामीणों ने गेट के पास का पर्दा हटाया, तो अंदर पत्नी और तीन बच्चों के शव देखकर वे दंग रह गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शटर के ताले तोड़े और शवों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की।


कमरे के अंदर का भयावह दृश्य

पुलिस ने घर के अंदर प्रवेश करते ही कुल पांच शव बरामद किए। सत्यवीर फांसी पर लटका हुआ था, जबकि उसकी पत्नी रामश्री और तीन बच्चों- प्राची, अमरवती और गिरीश के शव एक ही चारपाई पर पड़े हुए थे। डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि पत्नी के गले पर चोट के निशान मिले हैं, जबकि बच्चों के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं थी। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिससे किसी बाहरी हमले की संभावना कम लगती है।


सत्यवीर के बेटे की बीमारी का जिक्र

इस सामूहिक आत्महत्या के पीछे का मुख्य कारण सत्यवीर के दस वर्षीय बेटे गिरीश की गंभीर बीमारी बताई जा रही है। रिश्तेदारों के अनुसार, बेटे के इलाज के लिए सत्यवीर को बड़ी रकम की आवश्यकता थी, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। उसने गांव में मदद के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन कहीं से भी सहायता नहीं मिली। इस निराशा ने शायद उसे इस चरम कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।


पुलिस की प्रारंभिक जांच

पुलिस का मानना है कि सत्यवीर ने पहले अपने बच्चों को कोई जहरीला पदार्थ दिया होगा और फिर अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद खुद फांसी लगा ली। बच्चों के शरीर पर चोट के निशान न होना इस बात का संकेत है कि उन्हें जहर दिया गया था। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सभी वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चलेगा।


घटना के बाद का माहौल

सत्यवीर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और वह परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दुकान के साथ-साथ ईंट भट्ठे पर भी काम करता था। घटना की खबर फैलते ही नगला भोजराज और अमांपुर में शोक का माहौल बन गया है। सत्यवीर की साली ने बताया कि वह अपने बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था, लेकिन गरीबी ने उसके हौसले को तोड़ दिया। रिश्तेदारों का कहना है कि समय पर आर्थिक मदद न मिलना इस परिवार की तबाही का कारण बना।