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किडनी की बीमारियों का बढ़ता खतरा: जानें लक्षण और जरूरी टेस्ट

किडनी की बीमारियाँ अक्सर बिना लक्षण के बढ़ती हैं, जिससे मरीज को समय पर पता नहीं चलता। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, जैसे किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), बेहद जरूरी है। यह परीक्षण किडनी की कार्यक्षमता को मापता है और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। जानें कि आपको कब और कैसे अपनी किडनी की सेहत की जांच करानी चाहिए।
 

किडनी की भूमिका और बढ़ती बीमारियाँ

नई दिल्ली: मानव शरीर में रक्त को साफ करने और हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का मुख्य कार्य किडनी का होता है। लेकिन आजकल की खराब खानपान, तनाव और अनियमित जीवनशैली के कारण किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस समस्या का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है। जब तक मरीज को इसके लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक किडनी का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा पहले ही गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका होता है। इसलिए, किडनी की स्थिति को जानने के लिए नियमित चिकित्सा परीक्षण कराना अत्यंत आवश्यक हो गया है।


लक्षणों का न दिखना: विशेषज्ञ की व्याख्या

दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, किडनी की बीमारियाँ अक्सर 'साइलेंट किलर' की तरह कार्य करती हैं। दिल की बीमारियों में जैसे सीने में दर्द या बेचैनी जैसे संकेत मिलते हैं, किडनी के मामलों में ऐसा कोई सीधा संकेत नहीं होता। किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटती रहती है, और व्यक्ति सामान्य महसूस करता है। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह है कि गंभीर लक्षणों का इंतजार करने के बजाय नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।


KFT और अन्य टेस्ट: स्वास्थ्य की सच्चाई जानें

डॉ. घोटेकर का कहना है कि किडनी के स्वास्थ्य का सही आकलन करने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) सबसे प्रभावी और बुनियादी जांच है। इस सरल रक्त परीक्षण के माध्यम से खून में सीरम क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) के स्तर की सटीक जांच की जाती है। क्रिएटिनिन की रीडिंग के आधार पर डॉक्टर ई-जीएफआर (eGFR) की गणना करते हैं, जो बताता है कि किडनी रक्त को कितनी कुशलता से छान रही है।


हाई-रिस्क कैटेगरी के लोगों के लिए सलाह

हालांकि, हर स्वस्थ व्यक्ति को साल में KFT कराने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन उच्च जोखिम वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, जिन लोगों को डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या मोटापे की समस्या है, या जिनके परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास है, उन्हें साल में कम से कम एक बार KFT टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से पेनकिलर्स का सेवन करते हैं, उन्हें भी अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए।