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किम जोंग उन की दक्षिण कोरिया को चेतावनी: परमाणु खतरे का संकेत

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को एक गंभीर चेतावनी दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हुआ, तो उत्तर कोरिया उसे पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। किम ने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत के दरवाजे को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को बनाए रखा है। दक्षिण कोरिया ने इस रुख को खेदजनक बताया है और शांति के प्रयास जारी रखने का आश्वासन दिया है।
 

किम जोंग उन का कड़ा संदेश

नई दिल्ली - उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को एक बार फिर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा महसूस होता है, तो परमाणु-संपन्न उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया को “पूरी तरह से नष्ट” कर सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने सियोल के साथ किसी भी वार्ता से इनकार किया है।


नीतियों की रूपरेखा

सरकारी मीडिया के अनुसार, किम ने सत्तारूढ़ पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद अगले पांच वर्षों के लिए नीतिगत प्राथमिकताओं का खाका प्रस्तुत किया। हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए और संकेत दिया कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तो संवाद संभव है।


दक्षिण कोरिया के प्रति कड़े बयान

दक्षिण कोरिया के खिलाफ किम का रुख
हाल के वर्षों में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति अपने रुख को और कड़ा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयानबाजी तत्काल सैन्य संघर्ष का संकेत नहीं देती, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम और मॉस्को व बीजिंग के साथ बढ़ते संबंधों के माध्यम से खुद को एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। आधिकारिक समाचार एजेंसी ने बताया कि किम ने सेना की परमाणु क्षमता को और मजबूत करने के लिए नई हथियार प्रणालियों के विकास पर जोर दिया है। उनका कहना है कि हाल के वर्षों में मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम में तेज प्रगति ने देश को एक स्थापित परमाणु शक्ति के रूप में खड़ा कर दिया है।


अमेरिका से बातचीत की शर्तें

संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ वार्ता
किम ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका लंबे समय से ठप पड़ी वार्ता को फिर से शुरू करना चाहता है, तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित “शत्रुतापूर्ण नीतियों” को छोड़ना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता विफल होने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद ठप पड़ा है।


दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया

दक्षिण कोरिया का रुख
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने उत्तर कोरिया के इस रुख को “खेदजनक” बताया है। मंत्रालय ने कहा कि सियोल शांति और स्थिरता के प्रयासों को धैर्यपूर्वक जारी रखेगा, भले ही प्योंगयांग अंतर-कोरियाई संबंधों को शत्रुतापूर्ण रूप में परिभाषित कर रहा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि किम का सख्त रुख आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप की राजनीति को और जटिल बना सकता है, हालांकि फिलहाल इसे रणनीतिक दबाव की नीति के तौर पर देखा जा रहा है।