कुल्लू दशहरा महोत्सव 2026: देवताओं का भव्य स्वागत और सांस्कृतिक कार्यक्रम
कुल्लू दशहरा महोत्सव 2026 की शुरुआत
कुल्लू दशहरा महोत्सव 2026: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में आज, 21 अक्टूबर से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का आगाज हो रहा है। यह महोत्सव ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सात दिनों तक देव आस्था, लोक संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस बार 347 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ इस महोत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें राज्यपाल कविंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कुल्लू दशहरा, देश के अन्य हिस्सों में दशहरा समाप्त होने के बाद शुरू होने के लिए भी जाना जाता है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी देव परंपरा और हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
भगवान रघुनाथ की रथयात्रा से महोत्सव का आरंभ
कुल्लू दशहरा उत्सव 21 से 27 अक्टूबर तक चलेगा। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान रघुनाथ की रथयात्रा है, जो बुधवार को शुरू होगी। कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवता अपनी पारंपरिक पालकियों में भक्तों के साथ ढालपुर मैदान पहुंच रहे हैं। परंपरा के अनुसार, देवी-देवता भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और फिर रथयात्रा में भाग लेते हैं। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। महोत्सव में माता हिडिंबा का भी विशेष महत्व है, जिनकी शोभायात्रा मनाली से कुल्लू पहुंची है।
366 वर्ष पुरानी देवी-देवताओं की परंपरा
कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं को निमंत्रण देने की परंपरा 1660 से जुड़ी हुई है। इस साल, इस परंपरा को 366 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह परंपरा राजा के समय से शुरू हुई थी और आज भी जारी है, हालांकि अब प्रशासन इस आयोजन की व्यवस्थाएं संभालता है। इस उत्सव में आसपास के गांवों और घाटियों के देवी-देवता अपने अनुयायियों के साथ शामिल होते हैं।
347 देवी-देवताओं को भेजा गया निमंत्रण
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव समिति ने 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। उत्सव के दौरान 300 से अधिक देवी-देवताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
माफीदार और गैर माफीदार देवी-देवताओं की परंपरा
कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं को माफीदार और गैर माफीदार श्रेणियों में बांटने की परंपरा भी है। माफीदार श्रेणी उन देवी-देवताओं से जुड़ी है जिनके नाम पर भूमि है, जबकि गैर माफीदार श्रेणी में वे देवी-देवता आते हैं जिनकी भूमि पर राजस्व कर लिया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
कुल्लू दशहरा में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। इस वर्ष कई देशों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे, जिसमें इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल शामिल हैं।
सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम
महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कुल 1,265 जवानों को तैनात किया गया है, जिनमें 1,125 पुलिसकर्मी और 140 होमगार्ड शामिल हैं।