कुल्लू में सरकारी स्कूल के 40 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, जांच शुरू
कुल्लू में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों की अचानक तबीयत खराब होने से हड़कंप मच गया। बारी स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार को दोपहर का खाना खाने के बाद लगभग 40 बच्चों ने बीमार होने की शिकायत की। उन्हें तुरंत पटलीकुल के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से 7 बच्चों को गंभीर हालत में कुल्लू जिला अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों ने दूषित पानी को इस घटना का संभावित कारण बताया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बच्चों की तबीयत में सुधार
लंच के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में 13 बच्चों का इलाज चल रहा है। सात बच्चों को कुल्लू के सिविल अस्पताल में भेजा गया है, जबकि 20 बच्चों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। बुधवार को, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बाल रोग विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सकों के साथ अस्पताल जाकर बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।
स्थानीय विधायक का दौरा
स्थानीय विधायक भुवनेश्वर गौर ने भी अस्पताल जाकर भर्ती बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना के कारणों की स्पष्टता के लिए पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और जल शक्ति विभाग की टीमों ने पानी के स्रोत से नमूने लिए हैं, जिनकी जांच के बाद दूषित पानी की संभावना पर स्थिति स्पष्ट होगी।
जांच समिति का गठन
इस मामले की गहन जांच के लिए मनाली के उपमंडल मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। यह समिति यह पता लगाएगी कि बच्चों के बीमार होने का असली कारण क्या था। प्रशासन स्कूल में उपलब्ध पानी और भोजन की व्यवस्था पर भी ध्यान दे रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है और उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।
गुजरात में भी हुआ था ऐसा मामला
पिछले महीने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के सरकारी आवासीय विद्यालय में भी संदिग्ध खाद्य विषाक्तता के कारण 147 छात्राएं बीमार हुई थीं। इनमें से 102 का इलाज चूड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में और 45 का सुरेंद्रनगर के दो अस्पतालों में किया गया था। छात्राओं ने पेट दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत की थी। भोजन के नमूने जांच के लिए लिए गए थे। कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर घटना की जानकारी समय पर न देने का आरोप भी लगाया था।