कृषि मेले में किसानों की मेहनत का जादू: विशाल सब्जियों का प्रदर्शन
कृषि मेले का अनूठा अनुभव
हिसार में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि मेले ने इस बार विज्ञान और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है, जिसने किसानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेले के प्रदर्शनी क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई जब लोगों ने 20 किलो वजनी पेठा और लगभग 6 फुट लंबी घीया देखी। इन विशाल सब्जियों को देखने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दूर से आए किसानों की भीड़ लगी रही। यह आयोजन केवल मशीनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मिट्टी की ताकत को प्रदर्शित करने का एक मंच बन गया है।
प्राकृतिक खेती का जादू: 13 साल की मेहनत से उगे 'महाबली' पेठे
सोनीपत के प्रगतिशील किसान जोगिंद्र सिंह राणा मेले में चर्चा का मुख्य विषय बने हुए हैं। उन्होंने पिछले 13 वर्षों से पूरी तरह रासायनिक खाद मुक्त खेती की है और बताया कि यह 20 किलो का पेठा उनकी मेहनत का परिणाम है। वे न केवल फसल उगाते हैं, बल्कि सब्जियों के बीज भी खुद तैयार करते हैं ताकि अन्य किसान महंगे और मिलावटी बीजों पर निर्भर न रहें। जोगिंद्र का मानना है कि यदि किसान खुद बीज बनाना सीख लें, तो खेती की लागत को आधा किया जा सकता है।
प्रोसेसिंग से बदल रही है तकदीर
मेले में नवाचार की एक मिसाल पेश करते हुए किसान संजय आर्य ने अपने 15 साल के अनुभव को साझा किया। उन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़कर गन्ने से शुद्ध कुल्फी बनाने का स्टार्टअप शुरू किया है। उनकी कुल्फी बाजार की मिलावटी आइसक्रीम से पूरी तरह अलग और स्वास्थ्यवर्धक है। संजय का कहना है कि यदि कोई किसान एक एकड़ गन्ने की फसल को सीधे मिल में बेचने के बजाय उसका मूल्य संवर्धन (Processing) करे, तो उसकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है।
काले आलू और 14 किलो के प्याज ने जीता सबका दिल
विविधता के मामले में यह मेला रिकॉर्ड तोड़ रहा है। बड़वासनी के एक किसान ने काले आलू और 14 किलो के पेठे का प्रदर्शन किया, जिसे देखकर कृषि विशेषज्ञ भी हैरान रह गए। वहीं, पड़ोसी राज्य राजस्थान के भादरा से आए एक किसान ने 14 किलो का विशाल प्याज प्रदर्शित कर मेले में विशेष स्थान बनाया। इन उपलब्धियों के लिए किसानों को मंच पर सम्मानित भी किया गया। यह मेला यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और जैविक तरीकों के मेल से खेती को घाटे के सौदे से बाहर निकालकर एक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।