×

कृषि विज्ञान मेले में केंद्रीय मंत्री ने पेश किया कृषि सुधारों का रोडमैप

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण कृषि सुधारों का रोडमैप पेश किया, जिसमें पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही पर जोर दिया गया। चौहान ने किसानों के बकाया भुगतान में देरी, कीटनाशकों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया, और एमएसपी पर खरीद की समयसीमा पर भी चर्चा की। उन्होंने किसानों को 'जीवनदाता' बताते हुए उनकी सेवा को भगवान की सेवा के समान बताया। इस मेले को किसानों का राष्ट्रीय महाकुंभ बताते हुए, उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास का एक महत्वपूर्ण मंच कहा।
 

कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन

नई दिल्ली - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कृषि क्षेत्र में सुधारों का एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया, जो 'विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसानों के पैसे को रोकने की पुरानी प्रणाली समाप्त होगी और सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।


किसानों के साथ संवाद

शिवराज सिंह चौहान ने मेले के उद्घाटन के दौरान पौधारोपण किया और किसानों के साथ संवाद करते हुए कहा कि नीति निर्माण में किसानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे 'किसान प्रथम' की भावना को बढ़ावा मिला।


कृषि सुधारों पर चर्चा

कृषि सुधारों पर चर्चा करते हुए, चौहान ने किसानों के बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, तो उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और यदि राज्यों में भुगतान में विलंब होता है, तो केंद्र का हिस्सा सीधे किसानों के खातों में भेजने पर विचार किया जा रहा है।


तकनीकी सहायता और मॉनिटरिंग

कृषि यंत्रीकरण और नई तकनीकों के लिए दी जा रही सहायता का उल्लेख करते हुए, चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार 18 से अधिक योजनाओं के तहत राज्यों को संसाधन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ असली किसानों तक पहुंचे।


कृषि केंद्रों की भूमिका

कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि केवीके को अनुसंधान और विस्तार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने केवीके को नई कृषि पद्धतियों और सफल मॉडलों को गांवों तक पहुँचाने का दायित्व सौंपा।


कीटनाशकों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया

कीटनाशकों की गुणवत्ता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर बात करते हुए, चौहान ने कहा कि मौजूदा प्रणाली जटिल है, जिससे ईमानदार कंपनियों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने लाइसेंस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


एमएसपी पर खरीद प्रक्रिया

एमएसपी पर खरीद के संबंध में, उन्होंने कहा कि मौजूदा तीन महीने की समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर एक महीने के भीतर खरीद प्रक्रिया पूरी की जाए।


कृषि सब्सिडी और डीबीटी

कृषि सब्सिडी पर बात करते हुए, चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार खाद पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यह सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में दी जाए ताकि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उर्वरक खरीद सकें।


विकसित कृषि संकल्प अभियान

आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए, चौहान ने 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का उल्लेख किया, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों को नई तकनीकों और शोध उपलब्धियों के बारे में जानकारी देंगे।


किसानों का महत्व

किसानों को 'जीवनदाता' बताते हुए, चौहान ने कहा कि उनकी सेवा भगवान की सेवा के समान है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे न केवल खाद्य सुरक्षा, बल्कि पोषण सुरक्षा के लिए भी उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने का संकल्प लें।


कृषि विज्ञान मेले का महत्व

चौहान ने इस मेले को किसानों का राष्ट्रीय महाकुंभ बताते हुए कहा कि यह आयोजन केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं का एक बड़ा संगम है। उन्होंने अगले साल से मेले को और व्यापक रूप से आयोजित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए।