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केंद्र सरकार का एंटी पेपर लीक विधेयक 2026 लोकसभा से पारित

केंद्र सरकार ने लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 को पारित किया है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाना है। इस विधेयक में पेपर लीक और नकल माफिया पर सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें दोषियों को 5 से 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, संगठित गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह विधेयक छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
 

सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल पर कड़ा प्रहार


केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर नियंत्रण के लिए एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पारित कर दिया है। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बावजूद, विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी मिली।


विधेयक का समर्थन और उद्देश्य

बुधवार को लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित किया गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक देखने को मिली, लेकिन सरकार ने विधेयक को मंजूरी दिलाने में सफलता प्राप्त की।


सरकार का मानना है कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना और भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।


नए कानून के महत्वपूर्ण प्रावधान


  • पेपर लीक और परीक्षा में धांधली पर सख्त सजा: दोषी पाए जाने पर 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।

  • भारी आर्थिक दंड: पेपर लीक या अनुचित साधनों के मामलों में 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

  • संगठित गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई: यदि अपराध संगठित गिरोह द्वारा किया गया, तो 7 साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा।

  • समयबद्ध जांच: सभी मामलों की जांच अधिकतम दो महीने में पूरी करना अनिवार्य होगा।

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष त्वरित अदालतें स्थापित करनी होंगी।

  • तीन महीने में मुकदमे का निपटारा: आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य है।

  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता: कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है।

  • छात्रों के हितों की सुरक्षा: कानून का मुख्य फोकस ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा करना है।

  • 2024 के कानून में संशोधन: यह विधेयक 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' को और प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है।