केंद्र सरकार का एंटी-पेपर लीक विधेयक: परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
नई दिल्ली में एंटी-पेपर लीक विधेयक का प्रस्ताव
नई दिल्ली: देशभर में पेपर लीक के मामलों और छात्रों के विरोध के बीच, केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य परीक्षा से संबंधित अपराधों पर त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया। सरकार का कहना है कि यह संशोधन मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाएगा, जिसमें जांच की समय-सीमा, विशेष अदालतों का गठन और दोषियों के लिए कड़ी सजा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
नए प्रस्ताव की विशेषताएँ
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के मामलों में सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव है। 2024 के कानून में जहां तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान था, वहीं नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 10 साल तक करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, जुर्माने की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
समयबद्ध जांच और अदालत की प्रक्रिया
नए विधेयक में हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर निर्णय देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, जांच को दो महीने में पूरा करने का प्रावधान भी रखा गया है, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।
विशेष टास्क फोर्स और अपील की प्रक्रिया
प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी, और हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर अपील पर निर्णय सुनाना होगा।
सरकार के सुधारात्मक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वीडियो संदेशों के माध्यम से छात्रों से संवाद करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की जानकारी दी थी। इसके बाद, उन्होंने एक छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणी करेंगे। यह समिति परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीकी सुधारों पर सुझाव देगी।
शिक्षा मंत्रालय और एनटीए में कार्रवाई
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद, धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद, प्रधानमंत्री ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। सरकार ने परीक्षा अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया है। इसके अलावा, एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार और परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बदलावों की योजना बनाई जा रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने यूपीएससी और एनटीए से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया है।