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केंद्र सरकार का जन्म और मृत्यु पंजीकरण में महत्वपूर्ण संशोधन

केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कानून में महत्वपूर्ण संशोधन का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष के भीतर नहीं दी जाती है, तो पंजीकरण केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर संभव होगा। यह कदम पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
 

जन्म और मृत्यु पंजीकरण में बदलाव

नई दिल्ली: केंद्र सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण से संबंधित कानून में महत्वपूर्ण बदलाव करने की योजना बना रही है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल के भीतर संबंधित अधिकारियों को नहीं दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम' में संशोधन का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पंजीकरण में देरी को रोकना, जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज करना और फर्जीवाड़े को रोकना है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड लगभग रियल-टाइम में डिजिटल प्रणाली के माध्यम से दर्ज हों, जिससे नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक कार्यों में सटीक आंकड़ों का उपयोग किया जा सके।


वर्तमान नियमों के अनुसार, हर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के माध्यम से कराना अनिवार्य है। यदि सूचना 30 दिनों के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और स्वयं प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण किया जा सकता है।


वर्तमान में, एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपमंडल मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति से पंजीकरण संभव है। प्रस्तावित संशोधन के तहत, दो वर्ष तक की देरी होने पर यही प्रक्रिया लागू रहेगी, लेकिन दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही किया जा सकेगा।


यह प्रस्तावित संशोधन जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।