केंद्र सरकार का नया पेपर लीक कानून: 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ का जुर्माना
नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और सरकार का बड़ा कदम
हाल ही में देशभर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की योजना बनाई है। यह नया कानून 2024 में लागू मौजूदा कानून में महत्वपूर्ण बदलाव करेगा। लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के विरोध के चलते सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार छात्रों की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
नए कानून के प्रमुख बदलाव
1. पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल
अब संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि पहले अधिकतम सजा 5 साल थी।
2. 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
नकल और पेपर लीक गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। परीक्षा रद्द होने पर दोबारा परीक्षा कराने का खर्च भी दोषियों से वसूला जाएगा।
3. AI और डिजिटल चीटिंग भी अपराध
AI की मदद से नकल, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, डिजिटल माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करना और साइबर फ्रॉड भी अब कानून के दायरे में आएंगे।
4. अधिकारियों पर भी कार्रवाई
परीक्षा एजेंसियों, तकनीकी कंपनियों, सेवा प्रदाताओं और लापरवाह अधिकारियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
5. तेज जांच और फास्ट-ट्रैक सुनवाई
पेपर लीक मामलों की जांच को और मजबूत किया जाएगा। केंद्र और राज्य की एजेंसियां मिलकर कार्रवाई करेंगी, और मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि पेपर लीक अब केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि संगठित अपराध का रूप ले चुका है। नए कानून का उद्देश्य ऐसे गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना है। सरकार का लक्ष्य ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकना है।