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केंद्र सरकार का 'मिशन वात्सल्य': बच्चों की सुरक्षा के लिए 1,034 करोड़ रुपये का आवंटन

केंद्र सरकार ने 'मिशन वात्सल्य' योजना के तहत बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए 1,034 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस योजना का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को सहायता प्रदान करना है। विभिन्न राज्यों को आवंटित फंड में असमानता देखी गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक और लक्षद्वीप को सबसे कम राशि मिली है। जानें इस योजना के तहत राज्यों को कितना फंड मिला और इसके पीछे की चुनौतियाँ क्या हैं।
 

मिशन वात्सल्य योजना का उद्देश्य

केंद्र सरकार ने देश में कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए 'मिशन वात्सल्य' योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 1,034 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में सांसद नीरज मौर्या और बाबू सिंह कुशवाहा के प्रश्न के उत्तर में दी।


बजट आवंटन की समीक्षा

सांसदों ने सरकार से पूछा कि क्या मिशन वात्सल्य के तहत बजट आवंटन, वास्तविक खर्च और उपलब्धियों की समीक्षा की गई है। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों के खर्च में बड़ा अंतर है, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक और लक्षद्वीप को सबसे कम फंड मिला है।


राज्यों को आवंटित फंड

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संसद में बताया कि उत्तर प्रदेश को 107.15 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 89.14 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 78.90 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 61.82 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लक्षद्वीप को केवल 9 लाख रुपये मिले हैं।


राज्यों के फंड आवंटन का विवरण

राज्यवार फंड आवंटन:


ज्यादा फंड पाने वाले राज्य



  • उत्तर प्रदेश: 107.15 करोड़ रुपये

  • तमिलनाडु: 89.14 करोड़ रुपये

  • महाराष्ट्र: 78.90 करोड़ रुपये

  • मध्य प्रदेश: 61.82 करोड़ रुपये

  • बिहार: 51.95 करोड़ रुपये

  • ओडिशा: 51.92 करोड़ रुपये

  • पश्चिम बंगाल: 47.50 करोड़ रुपये

  • कर्नाटक: 45.48 करोड़ रुपये

  • मेघालय: 42.75 करोड़ रुपये


सामान्य फंड पाने वाले राज्य



  • आंध्र प्रदेश: 38.72 करोड़ रुपये

  • मणिपुर: 34.36 करोड़ रुपये

  • जम्मू-कश्मीर: 33.79 करोड़ रुपये

  • मिजोरम: 33.65 करोड़ रुपये

  • राजस्थान: 30.43 करोड़ रुपये

  • झारखंड: 29.76 करोड़ रुपये

  • असम: 29.61 करोड़ रुपये

  • छत्तीसगढ़: 28.79 करोड़ रुपये

  • नगालैंड: 28.36 करोड़ रुपये

  • तेलंगाना: 27.26 करोड़ रुपये

  • हिमाचल प्रदेश: 22.56 करोड़ रुपये

  • उत्तराखंड: 20.14 करोड़ रुपये

  • त्रिपुरा: 18.11 करोड़ रुपये

  • पंजाब: 13.94 करोड़ रुपये

  • केरल: 13.80 करोड़ रुपये

  • सिक्किम: 8.51 करोड़ रुपये

  • हरियाणा: 7.85 करोड़ रुपये

  • अरुणाचल प्रदेश: 7.74 करोड़ रुपये


सबसे कम फंड पाने वाले राज्य



  • दिल्ली: 6.63 करोड़ रुपये

  • चंडीगढ़: 4.90 करोड़ रुपये

  • अंडमान व निकोबार द्वीप समूह: 3.60 करोड़ रुपये

  • पुडुचेरी: 3.21 करोड़ रुपये

  • लद्दाख: 3.20 करोड़ रुपये

  • गोवा: 3.07 करोड़ रुपये

  • दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव: 2.89 करोड़ रुपये

  • गुजरात: 2.49 करोड़ रुपये

  • लक्षद्वीप: 0.09 करोड़ रुपये


आवंटन में असमानता के कारण

सरकार ने बताया कि मंत्रालय प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठकों के माध्यम से राज्यों के साथ मिलकर सालाना कार्य योजना और फंड के उपयोग की नियमित समीक्षा करता है। जिन राज्यों ने अधिक मांग की, उन्हें उसी अनुसार बजट आवंटित किया गया।


मिशन वात्सल्य की चुनौतियाँ

कुछ सांसदों का कहना है कि बाल देखभाल संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों को समय पर सहायता नहीं मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की सेवाओं में भी खामियाँ हैं।


सांसदों ने यह भी बताया कि अनाथ और बेसहारा बच्चों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है, जिसका कारण जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और विभागों के बीच तालमेल की कमी है।


मंत्रालय का उत्तर

मंत्रालय ने सांसदों के सवालों का सीधा उत्तर नहीं दिया, लेकिन कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत बच्चों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन देना प्राथमिक लक्ष्य है।


मिशन वात्सल्य योजना का परिचय

मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत बच्चों को दो प्रकार की सहायता दी जाती है: संस्थागत और गैर-संस्थागत। योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि बच्चों को संस्थान में रखना अंतिम विकल्प होना चाहिए। पात्र बच्चों को हर महीने 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।


कोविड-19 महामारी के दौरान जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया, उनके लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना बनाई गई थी।


सरकार की कार्यप्रणाली

गुम और मिले हुए बच्चों की निगरानी के लिए मंत्रालय ने एक एकीकृत मिशन वात्सल्य पोर्टल विकसित किया है। यह पोर्टल विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से काम करता है और गुम बच्चों से जुड़ी FIR का मिलान करता है।


खोया-पाया मॉड्यूल के माध्यम से आम नागरिक गुम बच्चों की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, 24 घंटे चलने वाली चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भी उपलब्ध है।