केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया
सीबीआई और एनआईए के अधिकारियों की समिति में शामिल
Digital Arrest Scam, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सख्त कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति डिजिटल अरेस्ट के सभी पहलुओं की जांच करेगी, जिसमें सीबीआई और एनआईए के अधिकारी शामिल हैं। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट में दी गई है।
समिति की संरचना और कार्य
सरकार ने एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का समय मांगा है। इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। समिति में सीबीआई, एनआईए, दिल्ली पुलिस के आईजी रैंक के अधिकारी और भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के सदस्य सचिव शामिल हैं।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय और आरबीआई के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी समिति का हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन ठगी के मामलों पर सुनवाई के दौरान केंद्र से पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था। हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि साइबर अपराधी इस तरीके से देश से बड़ी रकम बाहर भेज रहे हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह देखकर हैरानी होती है कि इन ठगों ने देश से कितना पैसा बाहर भेज दिया है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि केंद्र सरकार एक इंटर-मिनिस्ट्रीयल बैठक बुलाने जा रही है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट से निपटने की रणनीति पर चर्चा होगी।
हरियाणा के बुजुर्ग दंपति की याचिका
हरियाणा के बुजुर्ग दंपति ने दायर की थी याचिका
हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने खुद को पुलिस और कोर्ट से जुड़ा दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया। ठगों ने उनका सारा पैसा ट्रांसफर करा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे अपराध केवल आम साइबर फ्रॉड नहीं हैं, बल्कि न्यायपालिका के नाम, मुहर और फर्जी आदेशों का दुरुपयोग करके पूरे सिस्टम पर जनता के भरोसे पर सीधा हमला करते हैं।
इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कोर्ट आदेश और जजों के नाम का दुरुपयोग करने वाले गैंग के खिलाफ देशव्यापी स्तर पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।