केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और वीजा नियमों में किया बड़ा बदलाव
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बदलाव
नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने भारत में निवास कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए नियमों के तहत कुछ पाकिस्तानी नागरिकों, धार्मिक अल्पसंख्यक शरणार्थियों, श्रीलंकाई तमिलों, तिब्बतियों और भारतीय मूल के व्यक्तियों को राहत प्रदान की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेंप्शन) (अमेंडमेंट) ऑर्डर, 2026' जारी किया, जिसमें इन संशोधनों की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के बीच यात्रा और पहचान दस्तावेजों से संबंधित नियमों को भी सरल बनाया गया है।
पाकिस्तानी नागरिकों के लिए पासपोर्ट नवीनीकरण में छूट
संशोधित आदेश के अनुसार, पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत में स्थायी रूप से बसने के इरादे से आए कुछ नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण की सामान्य शर्तों से छूट दी गई है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जिनके पास पाकिस्तान का कंप्यूटराइज्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड (सीएनआईसी) नहीं है।
मलेशिया और सिंगापुर से लौटे भारतीय मूल के लोगों को राहत
सरकार ने उन भारतीय मूल के लोगों को भी नए नियमों में शामिल किया है, जिन्होंने मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता प्राप्त की थी और 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत लौट आए थे। जिनका विदेशी पासपोर्ट अब वैध नहीं है, उन्हें भी राहत दी गई है।
भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा को सरल बनाना
नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए सड़क और हवाई मार्ग से यात्रा करने के नियमों को भी सरल बनाया गया है। यात्रियों को सामान्य पासपोर्ट के बजाय सरकार के आधिकारिक वीजा मैनुअल में निर्धारित पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति होगी।
तीसरे देशों के रास्ते यात्रा पर पासपोर्ट-वीजा की आवश्यकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि नेपाल और भूटान के नागरिक चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान के रास्ते भारत आते हैं, तो उनके पास वैध पासपोर्ट और वीजा होना आवश्यक है।
धार्मिक अल्पसंख्यक शरणार्थियों को विशेष छूट
संशोधित आदेश के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भी राहत दी गई है, जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देश से भागना पड़ा था।