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केंद्र सरकार ने मेटा पर बढ़ाई निगरानी, डीपफेक सामग्री के खिलाफ सख्त कदम

केंद्र सरकार ने मेटा पर डीपफेक और कृत्रिम रूप से निर्मित भ्रामक सामग्री के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से तकनीकी उपायों को मजबूत करने और ऐसे कंटेंट को जल्दी पहचानकर हटाने के लिए ठोस अनुपालन योजना की मांग की है। सरकार ने एल्गोरिदम में आवश्यक बदलाव और कंटेंट हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया है। इसके अलावा, डेटा स्थानीयकरण के नियमों का पालन करने की आवश्यकता भी उठाई गई है। अगले सप्ताह फिर से बैठक होने की संभावना है, जिसमें नए कदम तय किए जा सकते हैं।
 

नई दिल्ली में मेटा के खिलाफ कार्रवाई


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर डीपफेक और कृत्रिम रूप से निर्मित भ्रामक सामग्री के खिलाफ मेटा पर निगरानी बढ़ा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से तकनीकी उपायों को मजबूत करने और ऐसे कंटेंट को जल्दी पहचानकर हटाने के लिए एक ठोस अनुपालन योजना की मांग की है।


एल्गोरिदम में आवश्यक बदलाव

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने मेटा से उसके प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम की समीक्षा करने और आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया है। सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं सोशल मीडिया की तकनीकी व्यवस्था डीपफेक, प्रचार सामग्री या संशोधित वीडियो और तस्वीरों को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद तो नहीं कर रही। शुक्रवार को हुई बैठक में मेटा की तकनीकी टीम ने अधिकारियों को मौजूदा व्यवस्था की जानकारी दी। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट तकनीकी बदलाव और अनुपालन का रोडमैप देने पर जोर दिया।


कंटेंट हटाने की प्रक्रिया में तेजी

बैठक में सरकारी अधिकारियों ने मेटा से कंटेंट मॉडरेशन को और प्रभावी बनाने का आग्रह किया। विशेष रूप से, अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा भेजे गए हटाने के अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि डीपफेक, संशोधित तस्वीरें, भ्रामक पोस्ट और अवैध सामग्री की पहचान में लगने वाला समय कम हो। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने अपनी मौजूदा तकनीकी क्षमता और हानिकारक सामग्री से निपटने के तरीकों के बारे में प्रस्तुति दी, लेकिन अधिकारियों ने ठोस और तेज प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई।


डेटा स्थानीयकरण पर चर्चा

सरकार ने मेटा के सामने भारत के डेटा स्थानीयकरण नियमों का पालन करने का मुद्दा भी उठाया। अधिकारियों ने कंपनी से सरकारी एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का आग्रह किया, ताकि हानिकारक सामग्री की पहचान और उसे हटाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने मौजूदा प्रणालियों में कुछ कमियों को स्वीकार किया और डीपफेक तथा अन्य सिंथेटिक सामग्री से निपटने के लिए संभावित तकनीकी उपायों की जानकारी दी। सरकार और कंपनी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी।


अगली बैठक में उठेंगे नए कदम

सरकार की मेटा पर बढ़ी निगरानी के पीछे डीपफेक के अलावा बाल यौन शोषण सामग्री और अन्य हानिकारक कंटेंट को लेकर बढ़ती चिंता भी बताई जा रही है। दोनों पक्षों के बीच हाल के दिनों में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। शुक्रवार की बैठक के बाद यह सहमति बनी कि चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा और अगले सप्ताह फिर बैठक हो सकती है। सरकार चाहती है कि मेटा केवल सामग्री हटाने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके एल्गोरिदम भी ऐसे कंटेंट के प्रसार को रोकने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाएं।