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केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई: विपक्षी नेताओं पर फिशिंग का आरोप

केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ फिशिंग के आरोपों को जन्म दिया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी की गिरफ्तारी और उत्तराखंड में हरीश रावत के पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर छापे की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि एजेंसियां सबूत जुटाने के लिए सक्रिय हैं। कर्नाटक में भी मंत्री और उनकी बेटी के ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। झारखंड में छात्र आंदोलनकारियों की मांगें भी इसी संदर्भ में उठाई गई हैं।
 

फिशिंग का बढ़ता खतरा

डिजिटल लेन-देन के युग में फिशिंग की चर्चा तेजी से बढ़ी है। ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले फिशिंग का सहारा लेते हैं, जिसमें वे लोगों को फंसाने के लिए ईमेल और संदेश भेजते हैं। ये संदेश या तो डराने वाले होते हैं या लालच देने वाले। जो लोग इन जालों में फंस जाते हैं, उन्हें लूट लिया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्रीय एजेंसियां विपक्षी नेताओं को फंसाने के लिए इसी तरह की फिशिंग कर रही हैं। यदि कोई नेता सीधे तौर पर नहीं फंसता है या उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, तो एजेंसियां सबूत जुटाने के लिए उनके करीबी लोगों को निशाना बना रही हैं।


भूपेश बघेल के ओएसडी की गिरफ्तारी

हाल ही में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी को सीबीआई ने भर्ती घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया है। यह ध्यान देने योग्य है कि महादेव गेमिंग एप और शराब घोटाले की जांच पहले ही की जा चुकी है। बघेल के बेटे को भी गिरफ्तार किया गया था। अब भर्ती घोटाले में उनके पूर्व ओएसडी की गिरफ्तारी हुई है।


उत्तराखंड और कर्नाटक में छापे

उत्तराखंड में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर ईडी ने छापा मारा, जहां से लगभग सवा करोड़ रुपए की संपत्ति बरामद की गई। वहीं, कर्नाटक में हाल के दिनों में मुख्यमंत्री के करीबी बने मंत्री सतीश जरकिहोली और उनकी सांसद बेटी प्रियंका के ठिकानों पर भी ईडी ने छापे मारे।


झारखंड में छात्र आंदोलन

झारखंड में छात्र आंदोलनकारियों का एक समूह पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग कर रहा था। राज्य सरकार ने उनकी अन्य मांगों को मान लिया, लेकिन भाजपा समर्थित एक गुट आंदोलन समाप्त करने पर सहमत नहीं हो रहा था। उनकी मांगें भी फिशिंग के संदर्भ में ही थीं।