केंद्रीय कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक में सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी है, साथ ही सिडबी यानी स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता प्रदान करने का निर्णय भी लिया है। इन कदमों का उद्देश्य कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और छोटे उद्योगों को सस्ते ऋण उपलब्ध कराना है।
कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने के साथ-साथ इसके प्रचार और विकास से संबंधित गतिविधियों के लिए फंडिंग समर्थन बढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, योजना को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए आवश्यक गैप फंडिंग जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और निम्न आय वाले लोगों तक योजना की पहुंच बढ़ेगी।
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद हर महीने 1,000 से 5,000 रुपए तक की गारंटीकृत पेंशन मिलती है, जो व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है। 19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है।
सरकार का मानना है कि इस योजना को आगे बढ़ाने से भारत को एक पेंशन आधारित समाज बनाने में मदद मिलेगी और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने एमएसएमई क्षेत्र को राहत देने के लिए सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी- वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपए, जबकि 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपए। इस पूंजी से सिडबी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत कर सकेगा और एमएसएमई को अधिक मात्रा में सस्ते ऋण उपलब्ध करा पाएगा।
सरकार के अनुसार, इस इक्विटी निवेश के बाद सिडबी की मदद से वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इससे लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई लगभग 4 लोगों को रोजगार देता है।
सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में सिडबी की बैलेंस शीट पर जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ने वाली हैं, क्योंकि बैंक डिजिटल और बिना गारंटी वाले कर्ज, स्टार्टअप्स को वेंचर डेट और एमएसएमई को अधिक वित्त उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार आवश्यक है, ताकि सिडबी की कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेश्यो (सीआरएआर) मजबूत बनी रहे और उसकी क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित रहे।
अटल पेंशन योजना के विस्तार से करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, वहीं सिडबी को दी गई इक्विटी सहायता से एमएसएमई क्षेत्र को सस्ते ऋण, अधिक रोजगार और मजबूत विकास का मार्ग मिलेगा। ये दोनों निर्णय देश की अर्थव्यवस्था को समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।