×

केंद्रीय बैंकों का गोल्ड रिजर्व बढ़ाने का रुझान, डॉलर की हिस्सेदारी घटेगी

हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के केंद्रीय बैंक अगले पांच वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि सोने की हिस्सेदारी में वृद्धि होगी, जबकि डॉलर की हिस्सेदारी में कमी आएगी। इस सर्वेक्षण में 73 केंद्रीय बैंकों ने भाग लिया, जिसमें विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। जानें इस सर्वेक्षण के और भी महत्वपूर्ण निष्कर्ष।
 

गोल्ड रिजर्व में वृद्धि की संभावना


दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अगले पांच वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि इस दौरान डॉलर की हिस्सेदारी में कमी देखने को मिलेगी। यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) द्वारा मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण में सामने आई है।


डब्ल्यूजीसी के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे 2026 के अनुसार, 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में उनके कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जो पिछले वर्ष 76 प्रतिशत थी।


इस सर्वेक्षण में 73 केंद्रीय बैंकों ने भाग लिया, जिनमें 17 विकसित और 56 विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।


सर्वेक्षण में 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी में कमी आएगी, जबकि 15 प्रतिशत ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। 11 प्रतिशत ने डॉलर की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना जताई। हालांकि, उत्तरदाताओं ने यह भी कहा कि डॉलर वैश्विक स्तर पर रिजर्व मुद्रा बना रहेगा।


सर्वेक्षण के अनुसार, 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाएंगे। 11 प्रतिशत ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।


जब पूछा गया कि क्या उनका केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में गोल्ड रिजर्व बढ़ाएगा, तो 45 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया, जबकि 54 प्रतिशत ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। एक प्रतिशत ने गिरावट की संभावना जताई।


डब्ल्यूजीसी द्वारा पहले जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में केंद्रीय बैंकों ने 20 टन सोना खरीदा, जो अप्रैल के 16 टन से अधिक है, लेकिन पिछले 12 महीनों के औसत 27 टन से कम है।


डब्ल्यूजीसी ने बताया कि सोने की खरीदारी का कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहे हैं।