केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, मोदी सरकार में बदलाव की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा
केंद्र सरकार में संभावित बदलावों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी, और अब यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तुरंत स्वीकार कर लिया। जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य हैं और उन्होंने अल्पसंख्यक कार्य, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्हें पुनः राज्यसभा में नहीं भेजा गया।
राज्यसभा चुनावों के बाद की स्थिति
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में केंद्र सरकार के दो मंत्रियों के नाम चर्चा में रहे, जिनमें से एक जॉर्ज कुरियन और दूसरे रवनीत सिंह बिट्टू थे। रवनीत बिट्टू ने पहले ही घोषणा की है कि वह पंजाब में बीजेपी के लिए काम करेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि जॉर्ज कुरियन को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिसमें राज्यपाल का पद भी शामिल हो सकता है।
जॉर्ज कुरियन का परिचय
जॉर्ज कुरियन, जो केरल से हैं, लंबे समय से बीजेपी के साथ जुड़े हुए हैं। वह सुप्रीम कोर्ट में वकील रह चुके हैं और केरल में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। 2024 में राज्यसभा सांसद बनने के बाद, उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री बनाया गया था। उनका राज्यसभा कार्यकाल उपचुनाव के माध्यम से 2 साल से भी कम समय का रहा।
मोदी सरकार में संभावित बदलाव
कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में और भी कई चेहरों की विदाई हो सकती है। जॉर्ज कुरियन के अलावा, रवनीत बिट्टू का इस्तीफा भी तय माना जा रहा है। इसके साथ ही, कुछ अन्य नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। नितिन नवीन की टीम में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है।
नई राजनीतिक समीकरण
इसके अलावा, जिन दलों के नेता बीजेपी के साथ आ चुके हैं, उन्हें भी समायोजित किया जा सकता है। इसमें आम आदमी पार्टी से टूटे 7 राज्यसभा सांसद, तृणमूल कांग्रेस से टूटे 20 लोकसभा सांसद, शिवसेना (उद्धव बाला साहब) ठाकरे के 7 लोकसभा सांसद और अन्य नेता शामिल हैं। चर्चा है कि लोकसभा के मॉनसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें चुनावी राज्यों, सामाजिक समीकरण, अनुभव और युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी जाएगी।