केको फुजीमोरी की चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव में जीत: पेरू की नई राजनीतिक दिशा
पेरू में केको फुजीमोरी की ऐतिहासिक जीत
लीमा: पेरू की केको फुजीमोरी को एक बार फिर से राजनीतिक परिदृश्य में पहचान मिली है। उन्होंने तीन बार राष्ट्रपति चुनाव में भाग लिया था, लेकिन हर बार असफल रहीं। अब, चौथी बार में उन्होंने सफलता हासिल की है। यह जीत उनके दिवंगत पिता, अल्बर्टो फुजीमोरी की विरासत के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फुजीमोरी ने वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को हराकर देश में 'व्यवस्था और उम्मीद' बहाल करने का वादा किया है। यह जीत लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथ के पुनरुत्थान का संकेत है।
पेरू की एंडियाना न्यूज एजेंसी के अनुसार, 7 जून को हुए राष्ट्रपति पद के दूसरे चरण के चुनाव में फुजीमोरी ने बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की। अंतिम परिणामों के अनुसार, उन्होंने 1.8 करोड़ से अधिक पड़े मतों में से 50,000 से भी कम वोटों के अंतर से सांचेज को हराया। फुजीमोरी की पार्टी फुएरजा पॉपुलर को 50.135 प्रतिशत और सांचेज की टुगैदर फॉर पेरू पार्टी को 49.865 प्रतिशत मत मिले।
पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी ने विवादित मतपत्रों की समीक्षा में कई सप्ताह लगाए और 3 जुलाई को आधिकारिक विजेता की घोषणा की।
विजेता घोषित होने के बाद, फुजीमोरी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हर गुजरते दिन के साथ हम सभी पेरूवासियों के लिए व्यवस्था और उम्मीद के रास्ते पर आगे बढ़ने के और करीब पहुँच रहे हैं।'
यह चुनाव बढ़ते अपराध और राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दों पर लड़ा गया। पिछले दस वर्षों में पेरू में आठ राष्ट्रपति बदल चुके हैं। हाल के महीनों में, युवा पीढ़ी ने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई है।
फुजीमोरी ने अपने पिता की तरह सख्त शासन का वादा किया है, जबकि देश में जबरन वसूली और सुपारी हत्याओं में वृद्धि हो रही है।
अल्बर्टो फुजीमोरी को माओवादी विद्रोहियों का दमन करने के लिए सराहा गया था, लेकिन बाद में वे भ्रष्टाचार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में बदनाम हुए।
रोबर्टो सांचेज ने परिणामों की घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रारंभिक मतगणना में वे आगे थे, लेकिन बाद में फुजीमोरी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।
सांचेज ने पहले ही कहा था कि यदि फुजीमोरी की सरकार बनती है, तो वे उसे मान्यता नहीं देंगे। उनका आरोप था कि विदेशों में पड़े वोटों के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं।
केको फुजीमोरी 28 जुलाई को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।
फुजीमोरी ने इस चुनाव अभियान के दौरान अपनी छवि को नरम और सकारात्मक बनाने का प्रयास किया। वे 19 वर्ष की आयु में पहली महिला बनी थीं, जब उनकी मां ने अल्बर्टो फुजीमोरी से अलग होने का निर्णय लिया था।
दशकों से 'फुजीमोरी' नाम उनके लिए पहचान और राजनीतिक नेटवर्क का स्रोत रहा है, लेकिन यह आलोचना का कारण भी बना है। पेरू के लाखों नागरिक आज भी उनके पिता के शासनकाल की कड़वी यादों के कारण फुजीमोरी नाम वाले उम्मीदवारों को वोट देने से बचते हैं।