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केजरीवाल ने चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग की, चुनावों को रद्द करने की अपील

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। केजरीवाल का कहना है कि चुनाव आयोग का संचालन एक व्यक्ति नहीं कर सकता और उन्होंने आयोग के भीतर मतभेदों की ओर भी इशारा किया। इस पर चुनाव आयोग ने अपनी सफाई पेश की है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनावों को रद्द कर फिर से कराने की आवश्यकता है। केजरीवाल का कहना है कि ज्ञानेश कुमार अकेले चुनाव आयोग का संचालन कर रहे हैं।


केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए चुनावों को रद्द कर दोबारा कराना चाहिए।"


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि इसमें तीन सदस्य होते हैं। एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं, जो मिलकर निर्णय लेते हैं। किसी एक व्यक्ति को अकेले निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की बैठकें कई महीनों तक नहीं हो रही हैं और आदेशों की बौछार की जा रही है।


चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि आयोग के भीतर मतभेद नहीं हैं। आयोग के सूत्रों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी औपचारिक असहमति की बात को खारिज किया गया है। आयोग का कहना है कि अधिकारी अपनी राय साझा करते हैं, लेकिन इसे आपसी टकराव नहीं माना जाना चाहिए।


विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह विवाद तब बढ़ा जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। ये मामले नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित थे। इसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के कार्यों पर सवाल उठाए।


एसआईआर विवाद का कारण

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी और यह पूरे देश में फैली। इस प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए, जिससे यह राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। आयोग ने इन टिप्पणियों को औपचारिक असहमति मानने से इनकार किया है।