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केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए नया नियम: एफिडेविट अनिवार्य

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अब अपनी आस्था साबित करने के लिए एफिडेविट देना होगा। इस नए नियम के तहत, यदि कोई भी व्यक्ति सनातन धर्म में आस्था व्यक्त करता है, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इस निर्णय के बाद सारा अली खान का नाम चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने भी केदारनाथ में पूजा की है। जानें इस नए नियम के बारे में और कैसे यह श्रद्धालुओं की यात्रा को प्रभावित करेगा।
 

श्रद्धालुओं के लिए नया नियम

हर साल, लाखों भक्त केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने से पहले एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। अब इन धामों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी आस्था साबित करने के लिए एफिडेविट देना होगा। इस निर्णय के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान का नाम सबसे अधिक चर्चा में है।


बद्री-केदार मंदिर समिति का बयान

बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यदि सारा अली खान केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आती हैं, तो उन्हें भी सनातन धर्म में अपनी आस्था का एफिडेविट देना होगा। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।


गैर-सनातनियों के लिए वर्जित प्रवेश

बद्री-केदार मंदिर समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित कई मंदिरों में गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, सनातन धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करता है और इसके लिए शपथ पत्र देता है, तो उसे मंदिर में दर्शन की अनुमति दी जा सकती है।


सारा अली खान का केदारनाथ से जुड़ाव

सारा अली खान का केदारनाथ से विशेष संबंध है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'केदारनाथ' से की थी, जिसकी शूटिंग इसी क्षेत्र में हुई थी। वह समय-समय पर केदारनाथ आती रहती हैं, और उनकी पूजा-अर्चना करते हुए कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं।


अन्य हस्तियों का केदारनाथ दौरा

सारा अली खान के अलावा, जैकलीन फर्नांडिस भी केदारनाथ दर्शन कर चुकी हैं। वह 2023 में वहां गई थीं। इसके अलावा, 2024 में नुसरत भरुचा और टीवी स्टार हिना खान भी केदारनाथ का दौरा कर चुकी हैं।


नए नियम की प्रक्रिया

नए नियम के तहत, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को शपथ पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे भरकर वे अपनी आस्था का प्रमाण दे सकेंगे। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दर्शन की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।