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केन्या में धार्मिक नेता और उसके सहयोगियों को बच्चों की हत्या का दोषी ठहराया गया

केन्या में एक अदालत ने पॉल मैकेंजी और उसके 28 सहयोगियों को 190 बच्चों और एक वयस्क की हत्या का दोषी ठहराया है। यह मामला तब सामने आया जब लोगों को भूखा रखने के आरोपों की जांच शुरू हुई। मैकेंजी ने अपने अनुयायियों को बताया था कि दुनिया का अंत निकट है और भूखे रहने पर स्वर्ग की प्राप्ति होगी। इस घटना ने केन्या में धार्मिक संगठनों की निगरानी बढ़ाने की मांग को जन्म दिया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के बारे में।
 

महत्वपूर्ण अदालत का फैसला

केन्या में एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें धर्मगुरु पॉल मैकेंजी और उसके 28 सहयोगियों को 190 बच्चों और एक वयस्क की हत्या का दोषी पाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों को भूखा रखने के आरोपों पर उनकी दलीलें मान्य नहीं हैं। सभी दोषियों को 6 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी।


धर्म का दुरुपयोग

दुनिया के अंत का भय और स्वर्ग का प्रलोभन

पॉल मैकेंजी गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च के माध्यम से अपने धार्मिक अनुयायियों को प्रभावित करता था। सरकारी वकीलों के अनुसार, वह लोगों को बताता था कि दुनिया का अंत निकट है और भूखे रहने पर स्वर्ग की प्राप्ति होगी।


भोजन से वंचित करने की योजना

भोजन की कमी की रणनीति

जांचकर्ताओं के अनुसार, मैकेंजी ने भूखा रखने की योजना को तीन चरणों में विभाजित किया था। पहले बच्चों को, फिर महिलाओं और युवाओं को और अंत में पुरुषों को भूखा रखने का निर्णय लिया गया।


खौफनाक खुलासे

जंगल में मिलीं लाशें

इस मामले का खुलासा मार्च 2023 में हुआ, जब एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचित किया कि उसके भाई और भाभी ने मैकेंजी के कहने पर अपने बच्चों को भूखा रखकर मार दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और शाकाहोला जंगल में बड़े पैमाने पर खोजबीन की, जहां 400 से अधिक शव मिले हैं।


अन्य गंभीर आरोप

बच्चों को शिक्षा और चिकित्सा से वंचित करना

मैकेंजी अपने अनुयायियों को बच्चों को स्कूल भेजने और बीमार होने पर अस्पताल जाने से रोकता था। वह इन संस्थाओं को शैतान से जोड़ता था।


पुलिस की भूमिका पर सवाल

पुलिस की नजर में मैकेंजी

मैकेंजी 2017 से पुलिस की निगरानी में था। 2019 में उसका चर्च बंद कर दिया गया था, लेकिन उसने जंगल में जाकर अपना समूह जारी रखा। इस मामले में उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।


परिवारों का दुख

62 वर्षीय फ्रांसिस वांजे ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार के आठ सदस्यों को खोया है, जिनमें उनके दो पोते भी शामिल हैं। इस घटना ने केन्या में धार्मिक संगठनों की निगरानी बढ़ाने की मांग को जन्म दिया है।