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केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का ऐतिहासिक निर्णय

केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जो राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता देता है। यह निर्णय केरल विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद लिया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अब यह नाम परिवर्तन संसद में विधेयक के माध्यम से लागू होगा। इस कदम से राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी और यह भारत में क्षेत्रीय पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

केरल का नया नामकरण

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने केरल के सांस्कृतिक और भाषाई गौरव को मान्यता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव पारित किया गया। यह निर्णय केरल विधानसभा द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद लिया गया, जिसमें राज्य के नाम को मलयालम भाषा के मूल उच्चारण के अनुसार बदलने की मांग की गई थी।


कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली में आयोजित कैबिनेट की बैठक में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर गहन चर्चा हुई। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद, केंद्र सरकार आगामी संसदीय सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस निर्णय से केरल की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग पूरी हो गई है। हाल ही में केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बदलाव का समर्थन किया था।


राज्य विधानसभा का प्रस्ताव

केरल विधानसभा ने जून 2024 में एक विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए बताया कि मलयालम में राज्य को हमेशा 'केरलम' कहा जाता रहा है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में यह 'केरल' के रूप में दर्ज है। विधानसभा का उद्देश्य था कि संविधान की आठवीं अनुसूची में इसे 'केरलम' के रूप में मान्यता दी जाए।


संविधानिक प्रक्रिया

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है। प्रक्रिया में सबसे पहले संबंधित राज्य की विधानसभा प्रस्ताव पारित करती है। इसके बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पर विचार करता है और इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजता है। आज मोदी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई है। अब संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित होने के बाद, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से यह नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से लागू होगा।


भाषाई गौरव का महत्व

मलयालम भाषी लोगों के लिए 'केरलम' शब्द का ऐतिहासिक महत्व है। 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही 'केरलम' राज्य बनाने का आंदोलन चला था। सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि 'केरल' नाम औपनिवेशिक काल की देन है, जबकि 'केरलम' नाम राज्य की मूल भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। हाल ही में बिहार के 'गया' शहर का नाम बदलकर 'गयाजी' किए जाने के बाद, केरल का नाम परिवर्तन भारत में क्षेत्रीय और भाषाई विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।