केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का केंद्रीय सरकार का निर्णय
केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली: केंद्रीय सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने इसे एक लंबे समय से चली आ रही मांग का समाधान बताया।
भाषाई आधार पर नाम परिवर्तन
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में सबसे प्रमुख केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करना है। उन्होंने बताया कि राज्यों के पुनर्गठन के बाद से यह मांग उठती रही है कि राज्य का आधिकारिक नाम उसकी स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए। मलयालम में राज्य को 'केरलम' कहा जाता है, इसलिए यह मांग लंबे समय से की जा रही थी।
संविधानिक प्रक्रिया का पालन
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल केंद्र का एकतरफा निर्णय नहीं है, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसमें राज्य सरकार और विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्य विधानसभा की मंजूरी के बाद, केंद्र सरकार आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करेगी और फिर संसद में प्रस्ताव लाया जाएगा।
अन्य राज्यों के नाम परिवर्तन का संदर्भ
यह ध्यान देने योग्य है कि देश के कई राज्यों के नाम स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बदले जा चुके हैं। इसी क्रम में अब केरल को 'केरलम' नाम देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम 'केरलम' हो जाएगा।
बिल की प्रक्रिया
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 'केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026' को केरल राज्य विधानसभा को भेजेंगे। विधानसभा की राय मिलने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और इस बिल को संसद में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी।
संविधान का प्रावधान
संविधान के आर्टिकल 3 में मौजूदा राज्यों के नाम बदलने का प्रावधान है। इसके अनुसार, संसद कानून बनाकर किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना कोई भी बिल संसद में पेश नहीं किया जा सकता।