केरल का नाम बदलने का प्रस्ताव: क्या हाई कोर्ट का नाम भी बदलेगा?
केरल का नाम बदलने का निर्णय
केंद्रीय कैबिनेट ने केरल राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नाम मलयालम भाषा में है, और यदि यह संसद से पारित होता है, तो केरल का आधिकारिक नाम 'केरलम' हो जाएगा। वर्तमान में, संविधान की पहली अनुसूची में 1956 से 'केरल' नाम ही दर्ज है। राज्य के एक बड़े हिस्से ने इस नाम परिवर्तन का समर्थन किया है।
कैबिनेट की मंजूरी और विधानसभा की भूमिका
केंद्रीय कैबिनेट ने फरवरी 2026 में 'केरलम' नाम को मंजूरी दी। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत इस विधेयक को राज्य विधानसभा को भेजा, जहां जुलाई में इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। अब इस विधेयक के संसद में पास होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति का इंतजार है।
क्या हाई कोर्ट का नाम भी बदलेगा?
राज्य का नाम बदलने पर हाई कोर्ट का नाम बदलने की संभावना कम होती है। उदाहरण के लिए, मुंबई का नाम बॉम्बे से बदलकर मुंबई हुआ, लेकिन हाई कोर्ट अब भी बॉम्बे हाई कोर्ट कहलाता है। इसी तरह, चेन्नई, कोलकाता और ओडिशा के मामलों में भी नाम परिवर्तन नहीं हुआ।
राज्य का नाम बदलने का कारण
सुप्रीम कोर्ट के वकील अंजन दत्ता के अनुसार, भारतीय संविधान में शक्तियों का पृथक्करण सिद्धांत है। राज्य विधानसभा अपने शहरों या सड़कों के नाम बदल सकती है, लेकिन हाई कोर्ट का नाम बदलने का अधिकार केवल संसद के पास है। 2016 में संसद में हाई कोर्ट के नाम बदलने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह विधेयक पारित नहीं हो सका।
क्या हाई कोर्ट के नाम बदलने की कोशिश हुई?
मुंबई, चेन्नई और कोलकाता की राज्य सरकारों ने अपने-अपने हाई कोर्ट के नाम बदलने के प्रस्ताव पारित किए थे, लेकिन संसद द्वारा कानून पारित न होने के कारण ये नाम नहीं बदले जा सके।
राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया
राज्य का नाम बदलने से हाई कोर्ट का नाम अपने आप नहीं बदलता है। ओडिशा हाई कोर्ट का नाम संसद ने नहीं बदला, इसलिए पुराना नाम बना रहा। उत्तराखंड का मामला अलग है, जहां 2000 में उत्तरांचल राज्य बना और 2006 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। हालांकि, उस समय हाई कोर्ट के नाम में कोई संशोधन नहीं किया गया।
केरल का भविष्य
केरल सरकार ने केवल राज्य के नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है। हाई कोर्ट के नाम में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि राज्य सरकार भविष्य में हाई कोर्ट के नाम बदलने का प्रस्ताव देती है, तो संसद इसे पारित कर सकती है। अन्यथा, केरल हाई कोर्ट का नाम भी पुराने नामों की तरह बना रह सकता है।
एडवोकेट अंजन दत्ता का बयान
एडवोकेट अंजन दत्ता ने कहा, 'भारतीय संविधान में हाई कोर्ट की स्थापना का उल्लेख अनुच्छेद 214 में है, लेकिन नाम बदलने के लिए कोई स्पष्ट अनुच्छेद नहीं है।'