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केरल के नए राज्यपाल का मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध, राजनीतिक विवाद बढ़ा

केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस और CPI(M) ने इस निर्णय की आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह राज्यपाल का काम नहीं है कि वह लोगों की खान-पान की पसंद को निर्धारित करें। राज्यपाल कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया है कि यह निर्णय उनके व्यक्तिगत खान-पान के कारण लिया गया है। इस मुद्दे ने संविधान के अनुच्छेद 21 और खान-पान की संस्कृति पर बहस को जन्म दिया है।
 

राज्यपाल का नया आदेश

डिजिटल, समाचार। केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने अपने पद ग्रहण करने के तुरंत बाद लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन पर रोक लगाने का आदेश दिया। इस निर्णय पर कांग्रेस और CPI(M) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस का कहना है कि यह राज्यपाल का काम नहीं है कि वह लोगों की खान-पान की पसंद को निर्धारित करें।


कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने इसे अत्यधिक बताया

कांग्रेस महासचिव और अलप्पुझा के सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस निर्णय की निंदा करते हुए कहा कि केरल की खान-पान की संस्कृति अद्वितीय है। उन्होंने बताया कि मछली इस तटीय राज्य में लोगों के भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि लोगों को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन का चयन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।


राज्यपाल कार्यालय का स्पष्टीकरण

राज्यपाल कार्यालय ने क्या कहा?

राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, माथुर स्वयं शाकाहारी हैं, इसलिए लोकभवन की रसोई में यह परिवर्तन किया गया। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि रसोई में तैयार भोजन केवल राज्यपाल और उनके कुछ निजी स्टाफ के सदस्यों को दिया जाता है। अन्य कर्मचारी अपने भोजन के लिए घर से लाते हैं या बाहर खाते हैं। उनके खान-पान पर कोई प्रतिबंध नहीं है।


भोजन के अधिकार पर बहस

संविधान और खान-पान की संस्कृति

संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की सुरक्षा करता है, जिसमें भोजन और पोषण भी शामिल हैं। हालांकि, इस मामले में कानूनी प्रश्न इस बात पर निर्भर करेगा कि आदेश किस पर लागू होता है और इसका वास्तविक दायरा क्या है।

केरल में मछली पारंपरिक खान-पान के साथ-साथ रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और निर्यात से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध की खबर ने व्यक्तिगत खान-पान की पसंद और संस्थागत नियमों पर राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।