केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों पर चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस
चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण बैठक
चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के संबंध में कोच्चि में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुकबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, आयोग ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और समाज के प्रेरणादायक व्यक्तियों को सम्मानित किया।
युवाओं और प्रेरणादायक व्यक्तियों का सम्मान
इस अवसर पर अमृता, यानल सुलेमान और फेनल सारा जेफरसन जैसे युवा मतदाताओं को सम्मानित किया गया। अमृता सेंट पॉल्स कॉलेज से बीकॉम इन कोऑपरेशन, यानल सुलेमान बीकॉम इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट और फेनल सारा जेफरसन बी वोक इन मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक सिस्टम्स एंड वेलफेयर की पढ़ाई कर रही हैं।
96 वर्षीय मतदाता का सम्मान
इसके अलावा, 96 वर्षीय पीबी विशलम को भी सम्मानित किया गया, जो 1956 से सरकारी दाई के रूप में सेवा कर रही हैं और आज भी सक्रिय मतदाता हैं। दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले राजीव पलारोथी को भी सम्मानित किया गया।
राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठक
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोग ने केरल की सभी राजनीतिक पार्टियों और राज्य की चुनाव मशीनरी के साथ विस्तृत बैठकें कीं। इसमें मुख्य सचिव, डीजीपी, पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल रहे।
युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने युवाओं, स्विप आइकॉन और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, ताकि आगामी चुनाव में अधिक से अधिक लोग मतदान में भाग लें। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और चुनाव अधिकारियों की मेहनत की भी सराहना की गई।
केरल में लोकतंत्र की परंपरा
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि केरल में लोकतंत्र की परंपरा बहुत पुरानी है। यहां एक हजार साल पहले 'नट्टाकूट्टम' जैसी संस्थाएं सामूहिक निर्णय की परंपरा को आगे बढ़ा चुकी हैं।
चुनाव की तैयारी
आगामी चुनाव के लिए केरल में कुल 140 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 124 सामान्य सीटें, 14 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त होगा।
मतदाता संख्या और मतदान केंद्र
चुनाव आयोग के अनुसार, केरल में कुल 2,69,53,644 मतदाता हैं। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और कोस्टा रिका की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। राज्य में 30,471 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें इस बार 5,000 नए मतदान केंद्र जोड़े गए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी।
विशेष सुविधाएं
आयोग ने यह भी तय किया है कि किसी भी बूथ पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे। इसके अलावा, 397 महिला संचालित मतदान केंद्र और 790 से अधिक मॉडल मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुविधाएं
राज्य में लगभग 2.43 लाख दिव्यांग मतदाता हैं और 2 लाख से अधिक मतदाता 85 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। आयोग ने बताया कि यदि ये मतदाता चाहें तो उन्हें घर से मतदान (होम वोटिंग) की सुविधा दी जाएगी।
युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना
मतदान के लिए युवाओं को प्रेरित करने के लिए कॉलेजों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
मतदान केंद्रों की सुविधाएं
मतदान केंद्रों को सुविधाजनक बनाने के लिए कई व्यवस्थाएं की जाएंगी। सभी केंद्र ग्राउंड फ्लोर पर, रैंप, व्हीलचेयर, स्वयंसेवक, पीने का पानी, शौचालय, साइन बोर्ड, हेल्प डेस्क, और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के साथ बनाए जाएंगे।
नई तकनीक का उपयोग
चुनाव आयोग ने बताया कि पहले चुनाव से जुड़ी 40 अलग-अलग ऐप्स थीं, जिन्हें अब मिलाकर ईसीआईनेट नाम का एक ही प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इस ऐप के जरिए मतदाता उम्मीदवारों की जानकारी, मतदान प्रतिशत, परिणाम और अन्य जरूरी जानकारी अपने मोबाइल पर देख सकेंगे।
ईवीएम पर उम्मीदवारों की तस्वीरें
इसके अलावा, पहली बार केरल में ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें भी दिखाई जाएंगी, जिससे मतदाताओं को पहचानने में आसानी होगी। मतदान केंद्र के बाहर मोबाइल जमा करने की व्यवस्था भी होगी।
मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता
चुनाव आयोग ने कहा कि हर मतदान केंद्र पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग होगी और मतदान प्रतिशत का डेटा हर दो घंटे में अपडेट किया जाएगा। इसके अलावा, पोस्टल बैलेट की गिनती ईवीएम से दो राउंड पहले की जाएगी।
प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता
चुनाव के दौरान आयकर, कस्टम, आबकारी, वन विभाग समेत 24 प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय रहेंगी, ताकि नकदी, शराब, नशीले पदार्थ या किसी भी तरह के प्रलोभन को रोका जा सके।
सोशल मीडिया पर निगरानी
चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और गलत जानकारी पर सख्त नजर रखी जाएगी। केंद्रीय पर्यवेक्षकों की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी ताकि लोग शिकायत दर्ज करा सकें।