कैंसर के इलाज में नई तकनीक: प्रिसिजन मेडिसिन से मिलेगी नई उम्मीद
कैंसर उपचार में ऐतिहासिक प्रगति
नई दिल्ली। चिकित्सा क्षेत्र ने कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब चिकित्सकों को ट्यूमर के उपचार के लिए पारंपरिक 'हिट एंड ट्रायल' विधियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कैंसर के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए मरीजों के DNA प्रोफाइल का विश्लेषण किया जा रहा है। इस नई तकनीक को 'प्रिसिजन मेडिसिन' (Precision Medicine) कहा जाता है, जो कैंसर के मरीजों के लिए जीवन की नई आशा लेकर आई है।
यह तकनीक कैसे कार्य करती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर मरीज का कैंसर आनुवंशिक रूप से भिन्न होता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज के ट्यूमर का बायोप्सी सैंपल लिया जाता है और 'नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग' (Next-Generation Sequencing) परीक्षण किया जाता है। यह परीक्षण कैंसर कोशिकाओं में छिपे जेनेटिक म्यूटेशन यानी DNA में बदलाव को पहचानता है। इसके बाद, चिकित्सक सटीक रूप से यह निर्धारित कर पाते हैं कि कौन सा जीन कैंसर को बढ़ावा दे रहा है और उसी प्रभावित हिस्से को लक्षित करने वाली दवाएं दी जाती हैं।
क्यों है यह तकनीक मरीजों के लिए जीवनदायिनी?
कैंसर के उपचार में यह विधि एक प्रभावी उपाय के रूप में कार्य कर रही है। यह थेरेपी केवल कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करती है और इसके साइड इफेक्ट्स न्यूनतम होते हैं। कीमोथेरेपी की तुलना में इसमें बालों का झड़ना, अत्यधिक कमजोरी या उल्टी जैसे गंभीर लक्षण नहीं होते हैं। यह तकनीक चौथी स्टेज या अंतिम चरण के कैंसर में भी अत्यधिक प्रभावी साबित हो रही है।