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कैंसर दवाओं की कीमतों में भारी कटौती, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर

भारत में कैंसर की दवाओं की कीमतों में हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिसमें 543 ब्रांडों की कीमतों में कटौती की गई है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के निर्णय के बाद, कई दवाओं की कीमतें आधी से भी कम हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के चलते यह कदम उठाया गया है। जानें कौन सी दवाएं सस्ती हुईं और किनकी कीमतें स्थिर रहीं।
 

कैंसर दवाओं की कीमतों में बदलाव


भारत में कैंसर से संबंधित 543 दवाओं के ब्रांडों और पैक की कीमतों में संशोधन किया गया है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के निर्णय के अनुसार, 397 दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं, जिसमें से 217 दवाएं ऐसी हैं जिनकी कीमत आधी से भी कम हो गई है। 97 ब्रांड की दवाओं में 70% से अधिक और 50 ब्रांड की दवाओं में 80% से अधिक की कमी की गई है। इसके अलावा, पांच दवाओं की कीमतों में 90% से अधिक की कटौती की गई है।


महंगे इंजेक्शन की कीमत में कमी

एक सैमटेपा इंजेक्शन, जिसकी कीमत पहले 80,071 रुपये थी, अब केवल 7,150 रुपये में उपलब्ध होगा। इसी तरह, पैलबोप्रो दवा के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत 40,421 रुपये से घटकर 2,720 रुपये हो गई है।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का परिणाम

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद NPPA ने यह कदम उठाया। सर्वोच्च न्यायालय ने NPPA से पूछा था कि दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण क्यों नहीं लगाया जा रहा है। इसके बाद दवा कंपनियों ने नई कीमतें घोषित की हैं, जो 9 नवंबर से लागू होंगी। हालांकि, 146 ब्रांड-पैक की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित कर दिया है।


कुछ दवाओं की कीमतें स्थिर

कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है, जैसे कीट्रूडा, जो 21 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती है, इसकी कीमत अभी भी 2,16,500 रुपये है। इसी तरह, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसाइक्लिब की कीमत 24,435 रुपये है। अन्य दवाओं जैसे टैग्रिसो, टेसेंट्रिक, डार्जालेक्स और इम्फिंजी की कीमतें भी नहीं घटाई गई हैं।


अस्पतालों की जिम्मेदारी

नई कीमतों को लागू करने की जिम्मेदारी अब अस्पतालों पर होगी। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर नई कीमतें प्रदर्शित करनी होंगी, और रिटेलरों को भी अपनी फार्मेसी में नई दरें दिखानी होंगी। दवा कंपनियों को भी अपनी वेबसाइट पर दवा की कीमतें प्रकाशित करनी होंगी और इसे रिटेलरों और अस्पतालों तक पहुंचाना होगा।


सुप्रीम कोर्ट की चिंता

27 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों में बड़े अंतर पर सरकार से सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि पूरा सिस्टम दवा निर्माता कंपनियों की मदद कर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की नजरों के सामने यह सब हो रहा है, क्या इसे बेलगाम होने दिया जाना चाहिए।


कैंसर दवाओं की ऊंची कीमतें

सुप्रीम कोर्ट ने पहले सरकार से पूछा था कि 2700 रुपये की कैंसर दवा की MRP 27000 रुपये क्यों है। कोर्ट ने इसे नरसंहार की संज्ञा दी थी।