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कैलाश खेर ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाया

प्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाया और भक्ति का अनुभव साझा किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति की महिमा का वर्णन करते हुए उज्जैन के ऐतिहासिक महत्व को उजागर किया। कैलाश खेर ने अपनी यात्रा के दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव के दर्शन किए और अपने नए गाने 'जोगी' के बारे में भी चर्चा की। जानें उनके अनुभव और आध्यात्मिक यात्रा के बारे में।
 

कैलाश खेर की महाकाल यात्रा

उज्जैन: प्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में जाकर शीश नवाया। उन्होंने सुबह की भस्म आरती में भी भाग लिया। बाबा महाकाल के दर्शन के बाद, उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी शिवभक्ति का जिक्र किया। कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के प्रांगण में आना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य पूरा करने जैसा है। उन्होंने कहा, 'परमात्मा हमें अपने चरणों में बार-बार बुलाते हैं ताकि हम दिशाहीनता से बाहर निकल सकें।'


कैलाश खेर ने भारतीय संस्कृति की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, 'इस पवित्र भूमि पर जन्म लेना किसी सौभाग्य से कम नहीं है।' उन्होंने उज्जैन के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए इसे पूरे ब्रह्मांड और जीवन परंपराओं का जीवंत अभिलेख बताया। उन्होंने आगे कहा, 'पहले कर्क रेखा यहीं से गुजरती थी, लेकिन समय के साथ यह यूरोप के पास चली गई। भारत अपनी धारणाओं और परंपराओं पर अडिग है, और अब समय भारत का है।'


इससे पहले, 27 मई को कैलाश खेर ने बद्रीनाथ धाम जाकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद लिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी यात्रा की कुछ तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें वह मुस्कुराते हुए नजर आ रहे थे। उनके गले में रुद्राक्ष की माला और माथे पर चंदन का तिलक था, जो भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक है। तस्वीरों के बैकग्राउंड में बर्फ से ढके पहाड़ दिखाई दे रहे थे।


कैलाश खेर ने केदारनाथ धाम में भी भगवान शिव के दर्शन किए और वहां अपने प्रसिद्ध भक्ति गीत 'बम लहरी' का प्रदर्शन किया। उन्होंने इस अनुभव का एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, 'महादेव का धाम, पूरे सारे काम। जय जय केदार।' हाल ही में, कैलाश खेर अपने नए गाने 'जोगी' को लेकर भी चर्चा में रहे, जो आदि शंकराचार्य को समर्पित है। उन्होंने कहा कि इस गाने में संतों और ऋषियों की आध्यात्मिक भावना का अनुभव किया गया है।'