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कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं पर पुलिस की जांच जारी

कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के खिलाफ पुलिस जांच चल रही है। इन पर जंतर-मंतर पर बिना अनुमति घुसने और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई के आरोप हैं। पुलिस ने इन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। जानें इस मामले में क्या हुआ और जमानत की शर्तें क्या हैं।
 

पुलिस जांच की प्रक्रिया

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के खिलाफ दो मामलों में पुलिस द्वारा जांच चल रही है। इन दोनों के साथ पार्टी के सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। प्रारंभ में, इन लोगों ने समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन बाद में वे उपस्थित नहीं हुए। अब पुलिस इन तीनों को एक नया नोटिस भेजने की योजना बना रही है।


जंतर-मंतर पर हुई घटना

इस मामले में पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति घुसने और पुलिसकर्मियों के साथ कथित हाथापाई के आरोप में इन पर दो FIR दर्ज की गई हैं।


आशुतोष रांका, सौरव दास, अजिंक्य शिंदे और CJP के लगभग 10 अन्य सदस्य 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के लोहे के गेट को फांदकर अंदर घुस गए थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें कुछ ही मिनटों में हिरासत में ले लिया। अन्य सदस्यों को 24 घंटे के भीतर छोड़ दिया गया, लेकिन आशुतोष और सौरव को गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उन्होंने 11 अक्टूबर को एक बॉंड पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त थी.


पुलिस की कार्रवाई और FIR

पुलिस के अनुसार, इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। एक मामला कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है, जबकि दूसरा मामला संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पहले मामले में जनपथ लेन से घुसने के कारण FIR दर्ज की गई, और दूसरे मामले में जंतर-मंतर के पास बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट की घटना शामिल है।


जमानत की शर्तें

14 अक्टूबर को पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि यदि इन दोनों को रिहा किया गया, तो वे फिर से माहौल को खराब कर सकते हैं। इसके बाद, स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया गया।


आखिरकार, 21 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर रिहा किया कि वे तब तक जंतर-मंतर पर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे जब तक कि वह आधिकारिक तौर पर विरोध स्थल घोषित नहीं हो जाता। कोर्ट में दिए गए अपने मुचलके में उन्होंने यह भी वादा किया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और न्यायपालिका तथा SEM कोर्ट पर पूरा भरोसा रखेंगे।


नियमों का पालन

मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने बॉंड और शर्तों का सख्ती से पालन करें और हर सुनवाई में उपस्थित रहें। इसके साथ ही, उन्हें 23 अक्टूबर को अपनी जमानत के लिए पेश होने को कहा गया है, जिस पर पुलिस को अपनी वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा करनी है।