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कॉकरोच जनता पार्टी: मजाक से शुरू हुआ डिजिटल आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी, जो पहले एक मजाक के रूप में शुरू हुई थी, अब एक बड़ा डिजिटल आंदोलन बन चुकी है। इस पार्टी में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो बेरोजगारी और सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। जानें इस अनोखे आंदोलन के पीछे की कहानी और इसके संस्थापक के विचार।
 

नई दिल्ली में वायरल हुआ अनोखा ट्रेंड


नई दिल्ली: इन दिनों 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक एक अनोखा ट्रेंड इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। यह आंदोलन, जो पहले मजाक के रूप में शुरू हुआ था, अब बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की आवाज बन चुका है। इस पार्टी में केवल तीन दिनों में लगभग 20 लाख लोग शामिल हो चुके हैं।


कैसे शुरू हुआ यह आंदोलन?

यह सब 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कुछ युवाओं की तुलना 'कॉकरोचों' से की थी। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवा नौकरी न मिलने पर सोशल मीडिया एक्टिविस्ट या मीडिया क्रिटिक बन जाते हैं और दूसरों को निशाना बनाते हैं।


इस बयान ने सोशल मीडिया पर युवाओं का गुस्सा भड़का दिया। हालांकि, बाद में चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया था और वे केवल फर्जी डिग्री धारकों की बात कर रहे थे। लेकिन तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी।


मजाक में बनी पार्टी

16 मई को कुछ यूजर्स ने मजाक में 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन किया और सदस्यता के लिए एक गूगल फॉर्म साझा किया। उन्हें लगा कि यह केवल एक मजाक है, लेकिन तीन दिनों में ही 20 लाख से अधिक लोग इससे जुड़ गए। पार्टी के इंस्टाग्राम पेज पर 40 लाख से ज्यादा और एक्स अकाउंट पर लगभग 1 लाख फॉलोअर्स हो गए हैं।


हालांकि यह कोई वास्तविक राजनीतिक पार्टी नहीं है, युवा इसे एक डिजिटल आंदोलन के रूप में देख रहे हैं। इसके माध्यम से वे बेरोजगारी, सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक और युवाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ मीम्स और वीडियो बनाकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।


आंदोलन के पीछे का चेहरा

इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दिपके हैं, जो पहले आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया वॉलेंटियर रह चुके हैं और वर्तमान में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक मजाक को इतना बड़ा रिस्पॉन्स मिलेगा।


पार्टी की वेबसाइट पर इसके मजेदार नियम बताए गए हैं, जैसे आवेदक का बेरोजगार होना और दिनभर ऑनलाइन रहना। इस मजाक के बीच पार्टी ने एक गंभीर 5 सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया है, जिसमें बेरोजगारी, पेपर लीक, और मीडिया पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाया गया है। महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे बड़े नेताओं ने भी इस ट्रेंड का समर्थन किया है। जानकारों का मानना है कि यह मजाक देश के 'जेन-जी' युवाओं की वास्तविक हताशा और गुस्से को दर्शाता है।