कॉकरोच जनता पार्टी: युवा कार्यकर्ताओं की नई पहल
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी और कॉकरोच जनता पार्टी का उदय
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 15 मई को एक बयान में कहा कि कुछ युवा ऐसे होते हैं जैसे कॉकरोच, जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में स्थान। इनमें से कुछ लोग मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, और कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, फिर वे सभी पर हमले करने लगते हैं।
इसके एक दिन बाद, 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन हुआ। यह शुरुआत एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट के रूप में हुई, लेकिन जल्द ही यह पार्टी दुनियाभर में लोकप्रिय हो गई। CJP को युवाओं, कार्यकर्ताओं, नेताओं और कलाकारों का समर्थन मिला। हाल ही में, भारत में कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसके बाद 'Cockroach is Back' नाम से एक नया हैंडल बनाया गया।
अभिजीत दीपके का पेपर लीक पर बयान
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगा। उन्होंने एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की और लोगों से अधिक से अधिक संख्या में हस्ताक्षर करने की अपील की।
असली काम करने का समय
'अब असली काम करने का वक्त आ गया'
एक वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके ने कहा, 'लोग मुझसे कह रहे हैं कि मैं इंटरनेट पर हलचल मचा रहा हूं, लेकिन अब असली काम करने का समय आ गया है। हम शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के लिए एक पिटीशन शुरू करने जा रहे हैं।'
शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना होगा
शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना ही पड़ेगा: अभिजीत
अभिजीत ने पिटीशन पर अधिक से अधिक हस्ताक्षर करने की अपील की और कहा, 'अब समय आ गया है कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जाए। यह सिस्टम की गलती थी, जिसके कारण 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। हमें न्याय दिलाने के लिए आवाज उठानी होगी।'
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति
शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है
अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने एक पोस्टर का उपयोग किया। इस पोस्टर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर थी और लिखा था, 'शिक्षा मंत्री को पद से हटाने के लिए याचिका। हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। आत्महत्या करने वाले छात्रों की दुखद मौतों से लेकर पिछले 10 वर्षों में पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हुआ है। इस नाकामी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'