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कॉपर की कीमतों में उतार-चढ़ाव: ग्रीनलैंड के तनाव का प्रभाव

कॉपर की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ग्रीनलैंड के तनाव के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक स्थिति के चलते कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है। वर्तमान में कॉपर की कीमतें 1290 रुपये प्रति किलो तक गिर गई हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 5.8485 डॉलर प्रति औंस है। अमेरिका द्वारा संभावित टैरिफ के कारण कंपनियों ने अधिक तांबा जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे डिमांड में वृद्धि हुई है। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
 

कॉपर की कीमतों में हलचल

आज की कॉपर कीमतें: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक बाजार में कॉपर की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। सोने और चांदी की तरह, कॉपर की कीमतों में भी गिरावट देखी जा रही है। कल कीमतों ने नया उच्च स्तर छुआ था, लेकिन आज की गिरावट ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण कॉपर की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है।

तांबे की वर्तमान कीमत
शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर कॉपर की कीमत 1290 रुपये प्रति किलो तक गिर गई। 15 जनवरी को यह 1,325 रुपये प्रति किलो थी। हालांकि, कीमतों में गिरावट के बाद थोड़ी सुधार देखने को मिली है। बाजार के जानकारों का मानना है कि तांबे की कीमतों में फिर से तेजी आने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमत 5.8485 डॉलर प्रति औंस हो गई है।

2025 में तांबे की कीमतों में काफी वृद्धि देखने को मिली है। सोने और चांदी की तुलना में तांबे की कीमतों में भी तेजी आई है।

टैरिफ की अफवाहें
बाजार में यह भी चर्चा है कि अमेरिका आने वाले समय में तांबे के आयात पर 15% से 30% तक का टैरिफ लगा सकता है। इन अफवाहों के चलते कंपनियों ने अधिक तांबा जमा करना शुरू कर दिया है। डिमांड में आई इस वृद्धि के कारण कीमतों पर भी प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि सप्लाई सीमित और डिमांड उच्च बनी हुई है।