कोलकाता की रेड रोड: योग दिवस से लेकर ऐतिहासिक महत्व तक
योग दिवस का आयोजन
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता की प्रसिद्ध रेड रोड पर हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया। यह सड़क केवल सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका एक दिलचस्प इतिहास भी है, जिसमें यह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अस्थायी हवाई पट्टी के रूप में भी कार्य कर चुकी है।
रेड रोड का ऐतिहासिक महत्व
कोलकाता की रेड रोड, जिसे आधिकारिक तौर पर इंदिरा गांधी सरणी कहा जाता है, शहर के विशाल मैदान क्षेत्र के बीच से गुजरती है। यह सड़क ईडन गार्डन्स को फोर्ट विलियम के पश्चिमी द्वार से जोड़ती है और वर्षों से कोलकाता की महत्वपूर्ण औपचारिक और सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र रही है।
रेड रोड का निर्माण कब हुआ?
इतिहासकारों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण लगभग 1820 में हुआ था। उस समय इसे "सेक्रेटरीज वॉक" के नाम से जाना जाता था, जिसका उद्देश्य तत्कालीन गवर्नर जनरल के निवास को शहर के दक्षिणी हिस्सों से जोड़ना था। यह मार्ग ब्रिटिश अधिकारियों को भीड़भाड़ वाले व्यापारिक क्षेत्रों से बचाते हुए तेज आवाजाही की सुविधा प्रदान करता था।
रेड रोड का नामकरण
रेड रोड नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि सड़क के निर्माण के दौरान इसकी सतह पर लाल ईंटों की परत बिछाई गई थी, जिसके कारण स्थानीय लोगों ने इसे रेड रोड नाम दिया। कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसे लेडीज माइल के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यूरोपीय महिलाएं यहां टहलने आती थीं।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान महत्व
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, 1941 से 1945 के बीच, जापानी हवाई हमलों के खतरे के कारण ब्रिटिश प्रशासन ने रेड रोड को अस्थायी एयरस्ट्रिप में बदल दिया था। मित्र देशों के लड़ाकू विमान यहां से उड़ान भरते और उतरते थे। हालांकि सीमित चौड़ाई और धुंध के कारण विमान संचालन में कठिनाई थी, फिर भी इस सड़क ने कोलकाता की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेड रोड के ऐतिहासिक आयोजन
रेड रोड केवल युद्ध का गवाह नहीं रही, बल्कि कई ऐतिहासिक आयोजनों की साक्षी भी बनी है। 1911 में ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी के कोलकाता आगमन पर यहां भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया था। आज भी हर वर्ष गणतंत्र दिवस पर पश्चिम बंगाल की प्रमुख परेड इसी सड़क पर होती है।
नाम परिवर्तन और वर्तमान पहचान
अक्टूबर 1985 में इस सड़क का नाम बदलकर इंदिरा गांधी सरणी कर दिया गया, लेकिन कोलकाता के अधिकांश लोग आज भी इसे रेड रोड के नाम से जानते हैं। यह सड़क युद्ध, इतिहास और आधुनिक आयोजनों की गवाह बनकर आज भी शहर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।