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कोलकाता के डॉक्टर का विवादास्पद जय श्री राम डिस्काउंट ऑफर

कोलकाता के एक वरिष्ठ हृदय विशेषज्ञ ने अपने मरीजों को 'जय श्री राम' बोलने पर फीस में छूट देने का प्रस्ताव दिया, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया। इस कदम की मेडिकल समुदाय ने कड़ी आलोचना की है, और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्टीकरण मांगा है। डॉक्टर ने अपने बचाव में कहा कि वे बीजेपी के समर्थक हैं और यह प्रस्ताव एक कार्यकर्ता ने उनकी अनुमति से किया था। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
 

कोलकाता में डॉक्टर का बयान विवाद का कारण बना


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक वरिष्ठ हृदय विशेषज्ञ के बयान ने विवाद को जन्म दिया है। इस डॉक्टर ने अपने मरीजों को यह प्रस्ताव दिया कि यदि वे उनके क्लिनिक में 'जय श्री राम' का जाप करेंगे, तो उन्हें फीस में छूट मिलेगी। प्रसिद्ध इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह जानकारी फेसबुक पर साझा की।


उन्होंने अपने पोस्ट में उल्लेख किया कि जो मरीज 'जय श्री राम' कहेंगे, उन्हें बालीगंज फाड़ी स्थित उनके निजी चैंबर में कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की छूट दी जाएगी। इस पोस्ट में एक विशेष डिस्काउंट कोड भी शामिल था, जिसमें डॉ. हाजरा को बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल के साथ टोपी और स्कार्फ पहने हुए दिखाया गया था।


मेडिकल समुदाय की तीखी प्रतिक्रिया

मेडिकल कम्युनिटी ने की कड़ी आलोचना:


डॉ. हाजरा के इस बयान पर मेडिकल समुदाय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) बंगाल ने उनसे इस कदम पर स्पष्टीकरण मांगा है। एक पत्र में, IMA ने इसे चिकित्सा नैतिकता और पेशेवर आचरण के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि डॉक्टरों को धर्म या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर मरीजों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। एसोसिएशन ने उन्हें तीन दिन के भीतर जवाब देने का समय दिया है, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


डॉ. हाजरा का बचाव

डॉ. हाजरा ने किया अपना बचाव:


इस विवाद पर डॉ. हाजरा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि वे बीजेपी के कट्टर समर्थक हैं और यह पोस्ट एक बीजेपी कार्यकर्ता ने उनकी अनुमति से की थी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस छूट का लाभ उठाना चाहते हैं, वे फ्री क्लिनिक जा सकते हैं, जो पिछले 30 वर्षों से चल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने भविष्य में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा भी व्यक्त की है।


इस मामले पर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, जहां कुछ लोग डॉक्टर के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, वहीं अधिकांश ने इसे गैर-पेशेवर बताते हुए इसकी आलोचना की है।