कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के बंगले पर पुलिस की कार्रवाई: राजनीतिक बदलाव का संकेत
कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के बंगले पर पुलिस की कार्रवाई
नई दिल्ली: राजनीति में सत्ता का चक्र किस तरह से बदलता है, इसका एक ताजा उदाहरण कोलकाता के कालीघाट क्षेत्र में देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी अभिषेक बनर्जी के भव्य निवास 'शांतनिकेतन' पर कोलकाता पुलिस ने दस्तक दी। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में आए राजनीतिक परिवर्तनों के बीच, पुलिस का बिना किसी झिझक के उनके घर में प्रवेश करना चर्चा का विषय बन गया है।
'शांतनिकेतन' कभी एक अभेद्य किला माना जाता था, जहां राज्य के प्रमुख मंत्रियों, उद्योगपतियों और शीर्ष अधिकारियों को भी प्रवेश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। ममता बनर्जी के शासन में, कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय इसी बंगले से लिए जाते थे। लेकिन सोमवार को, इस आवास का दृश्य पूरी तरह से बदल गया, जब राज्य पुलिस के जवान बिना किसी संकोच के कानूनी कार्रवाई के लिए उनके घर में दाखिल हो गए।
सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस की नई रणनीति
सुवेंदु सरकार में बदले पुलिस के तेवर
2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की नई सरकार के गठन के बाद से बंगाल के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव आया है। पहले जो पुलिस अभिषेक बनर्जी के इशारों पर चलती थी, अब वही उनके खिलाफ सक्रिय हो गई है। यह अप्रत्याशित कार्रवाई उन सभी के लिए चौंकाने वाली है, जिन्होंने पिछले दशक में टीएमसी के इस 'युवराज' का प्रभाव देखा था।
अभिषेक बनर्जी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा
घोटालों के दलदल में फंसे 'युवराज'
डायमंड हार्बर से सांसद और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों, जैसे ईडी और सीबीआई, के साथ-साथ राज्य पुलिस ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। उन पर करोड़ों रुपये के कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले, पशु तस्करी, प्राथमिक शिक्षक भर्ती में धोखाधड़ी और राशन घोटाले के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच टीम का कहना है कि इन सभी घोटालों के वित्तीय संबंध सीधे उनके कालीघाट स्थित आवास से जुड़े हुए हैं।
राजनीतिक बदलाव का संकेत
बदले की नहीं, यह बदलाव की राजनीति
इस अचानक हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्य की सत्ताधारी भाजपा और उसके समर्थकों का कहना है कि यह कोई दुर्भावनापूर्ण 'बदले की राजनीति' नहीं है, बल्कि बंगाल में वास्तविक राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव का संकेत है। नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल को दशकों पुराने सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार से मुक्त कराना है।