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कोलकाता में पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन: राजनीति में एक युग का अंत

पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन कोलकाता के अपोलो हॉस्पिटल में हुआ। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। रॉय की मृत्यु ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत कर दिया है। जानें उनके जीवन और योगदान के बारे में अधिक जानकारी।
 

मुकुल रॉय का निधन


पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेता मुकुल रॉय का निधन हो गया है। रविवार की रात 1:30 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। लंबे समय से डिमेंशिया और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे रॉय हाल ही में कोमा में चले गए थे।


राजनीतिक सफर और योगदान

ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। वे तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, लेकिन 2017 में भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में रहते हुए उन्होंने बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में, वे फिर से टीएमसी में लौट आए। उनकी मृत्यु ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण युग का समापन किया है।


सुभ्रांशु रॉय का दुखद बयान

सुभ्रांशु रॉय ने आज तक बंगला से बातचीत में भावुक होकर कहा, "सब कुछ खत्म हो गया।" उन्होंने बताया कि उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ और उन्हें बचाना संभव नहीं था।


स्वास्थ्य की स्थिति

पिछले दो वर्षों में, मुकुल रॉय को बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। वे परिचित चेहरों को पहचानने में असमर्थ थे और उन्हें राइल्स ट्यूब के माध्यम से तरल आहार दिया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास पर लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।


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