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कोलकाता हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अवैध रिश्ते से जन्मे बच्चे का पेंशन पर हक

कोलकाता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें अवैध रिश्ते से जन्मे बच्चे को अपने पिता की पेंशन पर हक दिया गया है। यह मामला एक रेलवे कर्मचारी से जुड़ा है, जिसने बिना तलाक लिए दूसरी शादी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहली पत्नी और दूसरी पत्नी की संतान दोनों को पेंशन में हिस्सा मिलेगा। जानें इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी और इसके पीछे की कानूनी जटिलताएँ।
 

कोलकाता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

कोलकाता: कोलकाता हाई कोर्ट ने संपत्ति और उत्तराधिकार से संबंधित एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के अवैध संबंध या बिना तलाक के दूसरी शादी से कोई संतान होती है, तो उस संतान का अपने पिता की पेंशन पर पूरा अधिकार है। यह आदेश पूर्वी रेलवे में कार्यरत एक गेटमैन से जुड़े पारिवारिक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।


पहली पत्नी की बीमारी और दूसरी शादी का रहस्य

यह कानूनी विवाद पूर्वी रेलवे के एक कर्मचारी से संबंधित है। उसकी 50 वर्षीय पहली पत्नी ने अदालत में कहा कि उसे मिर्गी के दौरे पड़ते हैं, जिसके कारण उसके पति ने उसे छोड़ दिया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने बिना तलाक लिए दूसरी महिला से गुपचुप शादी कर ली। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 31 दिसंबर, 2025 को रिटायरमेंट के बाद, कर्मचारी ने अपनी सर्विस और पेंशन बुक से पहली पत्नी और बेटे का नाम हटा दिया और उनकी जगह दूसरी पत्नी और उनकी 15 वर्षीय बेटी का नाम दर्ज कर दिया।


रेलवे का आधा-आधा पेंशन बांटने का आदेश

पहली पत्नी ने बताया कि 2012 से पहले उनके बीच गुजारा भत्ता का मामला चल रहा था, जिसमें अदालत ने पति को हर महीने 1000 रुपये देने का आदेश दिया था। महिला का कहना है कि 2012 के बाद से पति ने उन्हें एक भी पैसा नहीं दिया, जिससे उन्हें जीवन यापन में कठिनाई हुई। इसके बाद, उन्होंने न्याय के लिए पूर्वी रेलवे में शिकायत की। रेलवे ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत दूसरी शादी अवैध है, इसलिए पहली पत्नी और दूसरी पत्नी की बेटी को पेंशन में आधा-आधा हिस्सा मिलेगा।


जज का अंतिम फैसला

पति ने रेलवे के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। उसके वकील ने तर्क दिया कि पहली पत्नी ने खुद उसे अलग किया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि अदालत में तलाक का कोई वैध दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किया गया है। इसलिए, पहली पत्नी ही पेंशन की असली हकदार है। जज ने यह भी कहा कि भले ही दूसरी शादी अवैध हो, लेकिन उससे जन्मी संतान का पिता की पेंशन पर पूरा हक है। अदालत ने आदेश दिया कि सर्विस और पेंशन बुक में पहली पत्नी के साथ-साथ दूसरी पत्नी की 15 वर्षीय बेटी का नाम भी शामिल किया जाए।