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कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली का अनोखा उत्सव

कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। यहां मां अंबाबाई का भव्य श्रृंगार किया जाता है और मंदिर परिसर को दीपों से सजाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर के शिखर पर मशालें और दीए जलाए जाते हैं, जो भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि लाने का प्रतीक माने जाते हैं। जानें इस अद्भुत परंपरा के बारे में और कैसे यह मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
 

महान परंपरा का उत्सव

महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली: दीपावली का पर्व आते ही देशभर में घरों और मंदिरों में दीपों की जगमगाहट देखने को मिलती है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर में दिवाली के दौरान एक अनोखी और दिव्य परंपरा का पालन किया जाता है।

यहां दिवाली का उत्सव कई मायनों में विशेष होता है। मां अंबाबाई का भव्य श्रृंगार किया जाता है और मंदिर परिसर को दीपों से सजाया जाता है, जिससे श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं।

शिखर पर मशाल और दीप जलाना: दिवाली के इस पावन पर्व पर मंदिर के ऊंचे शिखर पर विशेष रूप से दीए और अखंड मशालें प्रज्वलित की जाती हैं, जो नरक चतुर्दशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक जलती रहती हैं। मान्यता है कि यह रोशनी भक्तों के जीवन से अज्ञानता, कठिनाइयों और आर्थिक तंगी के अंधकार को दूर करती है।

यह मंदिर देश के शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली या धनतेरस के अवसर पर मां अंबाबाई के दर्शन और पूजा करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और धन की कमी नहीं होती।

मंदिर की प्राचीन वास्तुकला भी लोगों को आकर्षित करती है। यहां होने वाला किरणोत्सव एक विशेष आकर्षण है, जब साल में दो बार सूर्य की किरणें देवी मां की प्रतिमा के चरणों तक पहुंचती हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।