क्या 3000 यूक्रेनी नागरिक भारत में घुस आए? सरकार ने किया बड़ा खुलासा
भारत सरकार का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे एक दावे पर स्पष्टता प्रदान की है। इन दावों में कहा गया था कि 3000 यूक्रेनी नागरिक भारत में घुसपैठ कर चुके हैं और पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही संगठनों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस तरह की सूचनाओं का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है और इन्हें केवल अफवाह माना जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर उठे सवालों का जवाब
सरकार ने बताया कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया गया है कि 3000 से अधिक यूक्रेनी नागरिक भारत में प्रवेश कर चुके हैं और अमेरिकी भाड़े के सैनिकों के सहयोग से विद्रोही समूहों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
इन सभी दावों को सरकार ने पूरी तरह से फर्जी करार दिया है।
वास्तविक स्थिति क्या है?
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह मामला दरअसल कुछ विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी से संबंधित है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मिजोरम के माध्यम से म्यांमार में अवैध प्रवेश के आरोप में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।
इमिग्रेशन और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में पूरी तरह से सतर्क हैं और गहन जांच जारी है। ये गिरफ्तारियां पिछले सप्ताह एक ठोस खुफिया सूचना के आधार पर की गई थीं।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने इन सभी को भारत के प्रमुख ट्रांजिट हब से गुजरने के प्रयास के दौरान हिरासत में लिया था। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी
अमेरिकी नागरिक: मैथ्यू आरोन वैनडाइक, जो एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक हैं, को कोलकाता एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। वह 'संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) के संस्थापक हैं और खुद को लीबियाई क्रांति का अनुभवी बताते हैं।
यूक्रेनी नागरिक: हुर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफंकिव मैरियन, होनचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर। इन सभी को शुरुआत में दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था।
आरोपों की गंभीरता
इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र मिलिशिया की मदद करने का आरोप है। ये मिलिशिया भारत विरोधी विद्रोही समूहों के साथ मिलकर काम करते हैं।
NIA की FIR में खुलासे
NIA की FIR के अनुसार, यह पूरी साजिश पहले से तैयार योजना का हिस्सा थी। कुल 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे।
वे असम के गुवाहाटी पहुंचे और वहां से मिजोरम के लिए रवाना हुए। इनके पास पूर्वोत्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए आवश्यक 'रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट' (RAP) या 'प्रोटेक्टेड एरिया परमिट' (PAP) नहीं था।
म्यांमार में प्रशिक्षण का उद्देश्य
जांच में यह सामने आया है कि यह समूह ड्रोन युद्ध और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देने के लिए अवैध रूप से म्यांमार में घुसा था। यह प्रशिक्षण वहां मौजूद 'एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स' (EAGs) को दिया जाना था।
भारत की सुरक्षा पर प्रभाव
FIR में बताया गया है कि म्यांमार के ये EAGs भारत में सक्रिय प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों को हथियार और अन्य सैन्य संसाधन उपलब्ध कराते हैं। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी देते हैं, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
अदालत में पेशी
गिरफ्तार किए गए सभी 7 आरोपियों को 16 मार्च को अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए 11 दिनों की NIA रिमांड में भेज दिया है।