×

क्या TMC के सांसद BJP में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं? जानें बंगाल की राजनीति में उठते सवाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के भाजपा से संपर्क की चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में असंतोष की लहर है, जिससे कई सांसद भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

कोलकाता में राजनीतिक हलचल


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की लहर उठ रही है। चर्चा है कि कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ सकती हैं।


सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद लोकसभा में पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इसे बंगाल की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।


TMC के सांसदों का भाजपा से संपर्क

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसदों में से लगभग 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, पांच से छह अन्य सांसदों के साथ भी बातचीत की जा रही है।


भाजपा और असंतुष्ट सांसदों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। यदि यह राजनीतिक समीकरण आगे बढ़ता है, तो बंगाल की राजनीति पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।


दल-बदल कानून से बचने की रणनीति

सूत्रों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम 19 से 20 सांसदों को एक साथ लाने की योजना बनाई जा रही है। इसी कारण संख्या बढ़ाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।


राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में सांसद एक साथ कदम उठाते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।


ममता और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं की चर्चा

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि संभावित टूट में कुछ ऐसे सांसदों के नाम शामिल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है।


इसलिए, यह मामला केवल संगठनात्मक संकट नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के लिए भी एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।


भाजपा की नजर राज्यसभा सांसदों पर

सूत्रों के अनुसार, भाजपा केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहना चाहती। चर्चा है कि पार्टी की नजर अब राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों पर भी है।


तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक शैली और आइपैक की भूमिका को लेकर भी असंतोष की बातें चल रही हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


भाजपा की ताकत में वृद्धि के संकेत

लोकसभा में भाजपा के पास वर्तमान में 240 सांसद हैं और केंद्र सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। यदि तृणमूल कांग्रेस के सांसद भाजपा में शामिल होते हैं, तो पार्टी की संसदीय ताकत और भी मजबूत हो सकती है।


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे भाजपा की सहयोगी दलों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।