क्या अल नीनो से प्रभावित होगा भारत का मानसून? जानें मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी
नई दिल्ली में मौसम की चिंता
नई दिल्ली: जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने लोगों को राहत दी थी, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि मानसून का दूसरा चरण कमजोर हो सकता है। प्रशांत महासागर में बन रहे शक्तिशाली अल नीनो के कारण अगस्त में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
अल नीनो की ताकतवर स्थिति
WMO के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2.9°C तक बढ़ सकता है। इसे मौसम विज्ञान में बहुत मजबूत अल नीनो कहा जाता है। WMO ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में यह अल नीनो और भी अधिक शक्तिशाली हो सकता है।
दुनिया के महासागर पहले से ही रिकॉर्ड गर्म हैं और इंडियन ओशन डिपोल भी सकारात्मक स्थिति में है। इन तीनों के संयोजन से वैश्विक मौसम पैटर्न में बदलाव आ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में भयंकर सूखा और अन्य में अचानक भारी बारिश हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, "दो महीने पहले मैंने कहा था कि अल नीनो दरवाजे पर है। अब यह हमारे घर में आ चुका है।" उनके अनुसार, यह प्राकृतिक घटना पहले से जलवायु परिवर्तन और गर्मी से प्रभावित दुनिया को और गर्म करेगी।
अगस्त में बारिश की कमी की संभावना
IMD का अनुमान है कि अगस्त में देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 94% रह सकती है, जो सामान्य से थोड़ी कम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून पहले से ही अनिश्चितता का सामना कर रहा है, जिससे कम बारिश का असर कृषि और जल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
इस साल का मानसून कैसा रहा
2026 में मानसून की स्थिति में निरंतरता नहीं रही है।
- जून: मानसून की धीमी प्रगति के कारण जून में 39.8% कम बारिश हुई, जो पिछले 100 वर्षों में सबसे सूखे जून में से एक था।
- जुलाई: कम दबाव के सिस्टम के कारण मध्य, पश्चिम और उत्तर भारत में अच्छी बारिश हुई, जिससे मानसून ने गति पकड़ी और लोगों को गर्मी से राहत मिली।
- अगस्त: जुलाई की राहत के बाद, IMD का अनुमान है कि बारिश फिर से कम हो सकती है।
अल नीनो का भारत पर प्रभाव
अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है। यह भारत से हजारों किलोमीटर दूर होता है, लेकिन इसका सीधा असर हमारे मानसून पर पड़ता है। इतिहास में जब भी मजबूत अल नीनो आया है, भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर हुई हैं और कई बार सूखे की स्थिति उत्पन्न हुई है।
अब वैज्ञानिकों की नजर इस बात पर है कि क्या सकारात्मक IOD अल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर पाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो मानसून का दूसरा भाग कम बारिश वाला साबित हो सकता है।