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क्या आप जानते हैं? अब साबुन और शैंपू की पैकेजिंग पर मिलेगी शाकाहारी और मांसाहारी जानकारी!

केंद्र सरकार ने साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की पैकेजिंग पर शाकाहारी और मांसाहारी जानकारी देने के लिए नए नियम लागू किए हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी इस नियम के तहत, उत्पादों पर हरे और लाल या भूरे रंग के निशान लगाने की आवश्यकता होगी। यह बदलाव ग्राहकों को खरीदारी के दौरान सही जानकारी प्रदान करेगा, जिससे वे अपनी पसंद के अनुसार उत्पाद चुन सकेंगे। जानें इस नए नियम के बारे में और इसके प्रभावों के बारे में विस्तार से।
 

नई दिल्ली में उपभोक्ता मामलों का नया नियम


नई दिल्ली: अब साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों की पैकेजिंग पर शाकाहारी और मांसाहारी होने की जानकारी अनिवार्य होगी। केंद्र सरकार ने कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरी उत्पादों की पैकेजिंग के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविकता के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त होगी।


इन नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह आवश्यक है कि उत्पाद की पैकेजिंग पर यह दर्शाया जाए कि वह शाकाहारी है या मांसाहारी। इसके लिए एक विशेष प्रणाली बनाई गई है। शाकाहारी उत्पादों पर हरे रंग का बिंदु और मांसाहारी उत्पादों पर लाल या भूरे रंग का निशान लगाना होगा। यह चिन्ह पैकेट के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए, ताकि ग्राहक की नजर आसानी से उस पर पड़े।


उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का महत्वपूर्ण कदम

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने किया संशोधन


यह परिवर्तन उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की पहल पर किया गया है। मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन करते हुए इस नई व्यवस्था को लागू किया है। इस संबंध में एक औपचारिक अधिसूचना जारी की गई थी, और सोमवार से ये नए नियम प्रभावी हो गए हैं। इसका मतलब है कि अब बाजार में मिलने वाले संबंधित उत्पादों की पैकेजिंग धीरे-धीरे इन नए मानकों के अनुरूप बदलती नजर आएगी।


उपभोक्ताओं के लिए नई सहूलियत

ग्राहकों को मिलेगी सहूलियत


इस निर्णय का सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों पर पड़ेगा। जब कोई व्यक्ति साबुन, शैंपू या टूथपेस्ट खरीदने जाएगा, तो पैकेट पर बने हरे, लाल या भूरे निशान को देखकर वह तुरंत समझ सकेगा कि उत्पाद किस श्रेणी का है। पहले ऐसे उत्पादों में सामग्री की जानकारी अक्सर बारीक अक्षरों में होती थी, जिसे पढ़ना और समझना ग्राहकों के लिए कठिन होता था। नए नियमों के लागू होने के बाद यह प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो जाएगी, जिससे लोग अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार सही उत्पाद चुन सकेंगे।